MAA SARASWATI: जिनसे संसार के समस्त जीव-जंतुओं को वाणी प्राप्त हो गई

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Maa Saraswati
Maa Saraswati

अंशुमन आनंद:

ज्ञान और बुद्धि की देवी Maa Saraswati की आराधना मनोयोग से होनी चाहिए. उनकी आराधना एक तपस्या है जो शिक्षा रुपी कर्म को करने से ही पूरी होती है. वे ब्रह्मा की मानसपुत्री हैं जो विद्या और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मानी गई हैं.

देवी सरस्वती का वर्ण श्वेत है. ब्रह्मा के कई पुत्र और पुत्रियां थे. Maa Saraswati को शारदा, शतरूपा, वाणी, वाग्देवी, वागेश्वरी और भारती भी कहा जाता है.




सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्माजी ने मनुष्य योनि की रचना की. परंतु वह अपनी सर्जना से संतुष्ट नहीं थे, तब उन्होंने विष्णु जी से आज्ञा लेकर अपने कमंडल से जल को पृथ्वी पर छिड़क दिया.

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उनके जल छिड़कते ही पृथ्वी पर कंपन होने लगा और एक अद्भुत शक्ति के रूप में चतुर्भुजी सुंदर स्त्री प्रकट हुई. जिनके एक हाथ में वीणा एवं दूसरा हाथ वर मुद्रा में था.




वहीं अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी. जब इस देवी ने वीणा का मधुर नाद किया तो संसार के समस्त जीव-जंतुओं को वाणी प्राप्त हो गई, तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा.




सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है. संगीत की उत्पत्ति करने के कारण वह संगीत की देवी भी हैं. वसंत पंचमी के दिन को इनके जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं.

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