3 तलाक़ पर कानून बनाने के लिए विधेयक LOKSABHA से पास

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Loksabha

3 तलाक़ पर कानून बनाने के लिए मुस्लिम महिला (अधिकार और विवाह का संरक्षण) विधेयक  Loksabha से पास हो गया. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में हंगामे के बीच इस विधेयक को पेश किया.

यह विधेयक पेश करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है क्योंकि सरकार महिलाओं को उनका न्याय दिलाने के लिए यह विधेयक ला रही है. उन्होंने बहस के दौरान कहा कि,”आज सुबह मैंने पढ़ा रामपुर की एक महिला को तीन तलाक़ इसलिए दिया गया क्योंकि वो सुबह देर से उठी थी. देश की महिलाएं बहुत पीड़ित हुआ करती थीं.

कानून ने बहस के दौरान  कहा कि तीन तलाक “महिलाओं की गरिमा से जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे ख़ारिज कर दिया था. उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद देश में स्थितियां बदलेंगी, लेकिन जहां इस साल 300 तीन तलाक़ हुए हैं वहीं सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद भी 100 तीन तलाक़ हुए हैं.”

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कानून मंत्री ने इस विधेयक के पक्ष में दुनिया भर के उदाहरण देते हुए कहा कि “इस्लामिक देश बांग्लादेश, मिस्र, मोरक्को, इंडोनेशिया, मलेशिया और पाकिस्तान में भी तीन तलाक़ को रेग्युलेट किया गया है. 1961 में बांग्लादेश में लाए गए कानून के मुताबिक पत्नी को तीन तलाक़ लिखित देना होता है.

उन्होंने दलील दी 1961 के कानून के अनुसार पाकिस्तान में भी तीन तलाक़ या तलाक़-ए-बिद्दत में पत्नी को लिखित नोटिस देना होता है. अगर नियम न माने तो एक साल कैद और पांच हज़ार रुपये जुर्माना का प्रावधान है.”

कानून मंत्री ने अपील की इस विधेयक को मजहबी नजरिए से नहीं देखना चाहिए और दलों को इस पर बंटना नहीं चाहिए.  आरजेडी, बीजेडी सहित समेत कई पार्टियों ने इस विधेयक में सजा के प्रावधान का विरोध किया है. वहीं AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस विधेयक को संविधान के खिलाफ बताते हुए इसका विरोध किया.

उन्होंने कहा संसद को इस मसले पर क़ानून बनाने का कोई क़ानूनी हक नहीं है क्योंकि यह विधेयक मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है. यह संविधान के अनुच्छेद 15 का उल्लंघन है.

विधेयक में कहा गया है कि मुस्लिम महिलाओं को अधिकार की रक्षा होगी और किसी भी व्यक्ति के अपनी पत्नी को शब्दों, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम या अन्य किसी भी तरीके से तलाक देने पर पाबंदी लगाई जाएगी. नए कानून में पीड़ित महिला के भरण पोषण, गुजारा भत्ता और नाबालिग़ बच्चों को रखने का अधिकार भी दिया जाएगा.

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कैबिनेट ने इसी महीने इस विधेयक पर मंजूरी दी है. विधेयक में एक साथ तीन तलाक़ कहने पर तीन साल तक की जेल का प्रावधान रखा गया है यानी इस कानून दंडात्मक श्रेणी में रखा गया है. ऐसा करने वालों के खिलाफ जुर्माने का प्रावधान भी है.

कई मुस्लिम संगठनों इस विधेयक का विरोध किया है. ऑल इंडिया मुस्लिम वुमन पर्सनल लॉ बोर्ड की चेयरपर्सन शाइस्ता अंबर ने कहा है कि निकाह एक करार है, इसे जो भी तोड़े उसे सजा मिलनी ही चाहिए, लेकिन यदि यह विधेयक कुरान या संविधान की भावना के अनुरुप नहीं रहा तो कोई भी मुस्लिम महिला इसे स्वीकार नहीं करेगी.

लेकिन सरकार इस विधेयक को पारित कराने के लिए प्रतिबद्ध दिख रही है. कथित तौर पर भाजपा सांसदों को गुरुवार को संसद में मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया गया.

इसी साल अगस्त में तीन तलाक पर सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यों वाली संविधानिक पीठ ने बहुमत से तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया और सरकार को 6 महीने के भीतर कानून बनाने के लिए कहा था.