LADIES- पता है आप कैसे फंसती जा रहीं है LIKES COMMENTS के जाल में?

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सुमन बाजपेयी:

Likes Comments क्या हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गए हैं? Social Media ने जिस तरह से अपनी पैर पसारे हैं और अपने चंगुल में हर वर्ग व आयु के व्यक्ति को ले लिया है. यह न केवल सोचने का विषय है बल्कि डरावना सच बनता जा रहा है.

दुख की बात तो यह है कि इसके जाल में सबसे ज्यादा Ladies फंस रही हैं. ऐसा लग रहा है मानो सोशल मीडिया के Likes Comments में ही जिंदगी का सुकून ढूंढा जा रहा है.

महिलाएं जिन्होंने शुरू में तो Social Media को एक टाइमपास की तरह लिया था, पर धीरे-धीरे वह उसकी एडिक्ट होती गईं. फेसबुक हर थोड़ी देर बाद देखना, Likes Comments करना, उस पर घंटों समय बिताना,  व्हाट्स अप पर मैसेज पढ़ना अब रुटीन बन गया है.

एक ऐसी लत जिसके बिना जीवन में एक अधूरेपन का एहसास होने लगा है. वहीं Likes-Comments का जाल उन्हें बुरी तरह उलझाता जा रहा है.




कंप्यूटर्स इन ह्यूमन बिहेवियर नामक पत्रिका के एक अध्ययन के मुताबिक फेसबुक इस्तेमाल करने वालों की संख्या में 20 फीसदी की वार्षिक वृद्धि के साथ तलाक दर में 2.18 से 4.323 फीसदी तक की वृद्धि दर्ज की गई है. सीधी सी बात है कि फेसबुक पर सारे दिन रहने से घर व परिवार के प्रति जिम्मेवारियों में कहीं न कहीं चूक तो हो रही है.

यह भी माना जा रहा है कि सोशल मीडिया के अधिक इस्तेमाल और घटती वैवाहिक संतुष्टि के बीच सीधा संबंध है. सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर आप का व्यवहार आप के जीवनसाथी का दिल दुखा सकता है, यह बात बहुत से अध्ययनों में स्पष्ट हो चुकी है.

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रिश्तों के मनोविज्ञान में सोशल मीडिया की उलझनें अपनी उपस्थिति दर्ज कराने लगी हैं. अध्ययनों के मुताबिक, जो लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करते वे अपनी वैवाहिक जिंदगी में 11 फीसदी तक अधिक खुश रहते हैं.




एक मामला पिछले दिनों सामने आया था जिसमें एक महिला की अपने पति से इसलिए लड़ाई हुई क्योंकि फेसबुक पर उसके पति ने उस की नई अपलोड की गई फोटोज को लाइक नहीं किया था और न ही कोई कमेंट किया था. उसकी सारी सहेलियों ने फोटोज लाइक किए थे और पति की ओर से कोई कमेंट न मिलने पर उसकी खिल्ली उड़ाई थी.

सुमन बाजपेयी

Likes- Comments में जीवन की खुशियां ढूंढती महिलाएं, फेसबुक पर सुकून तलाश कर रही हैं. फोटो से लेकर अपनी छोटी सी छोटी बातें तक शेयर कर रही हैं.

यहां तक कि नई मेड को काम पर रखा है, आज खाने में क्या बनाया है, बच्चे ने पॉटी की या नहीं यह बात भी पोस्ट की जाती है.

एक तरह से सोशल मीडिया पर पॉलीटिक्स भी जोर से चल रही है. जो मेरी पोस्ट को लाइक करेगा, उसी की पोस्ट को मैं Like करूंगी..या Comments. करें, की तर्ज पर एक साइलेंट वॉर चलता रहता है. Social Media पर अपनी पहचान बनाने के लिए भी भारी जद्दोजहद चल रही है.

 




समाजशास्त्री डॉ. नीलम सक्सेना का कहना है, “दबी हुई इच्छाएं और कुंठाएं फेसबुक के जरिए बाहर आ रही हैं. घर, परिवार व सोशल लाइफ को नेगलेक्ट कर महिलाएं अपना वजूद इस आभासी दुनिया में तलाश रही हैं.

स्कूल टाइम की फ्रेंड्स उनकी लाइफ में जुड़ रही हैं पर जो उनके करीब हैं, वे उनसे दूर हो रहे हैं. जो दूर बैठे हैं, उन्हें अपना बनाने की चाह में वे अपने रिश्तों को परे धकेल रही हैं. इससे संबंधों में दूरियां आ रही हैं क्योंकि जो वक्त अपनों के साथ बितना चाहिए वह सोशल मीडिया पर कुछ परिचित और कुछ अंजानों के साथ बीत रहा है.”

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कितने मैसेज आए, कितने लाइक…यह एक नशा है…अब महिलाएं यह सोचने में ज्यादा समय लगाती हैं कि फेसबुक पर क्या पोस्ट डालनी है…यहां तक कि बच्चों के अच्छे मार्क्स आए हों या पति की तरक्की हुई हो या सासू मां आने वाली हों या नई साड़ी खरीदी हो…उसे सबसे पहले फेसबुक पर लिखा जाता है.

विडंबना तो यह है कि इस जाल में फंसी महिला को इसमें और ज्यादा धंसना किसी सुखद अनुभूति से कम नहीं लग रहा, क्योंकि एक तरफ जहां Likes Comments की संख्या निरतंर बढ़ रही है वहीं फॉलोवर्स की संख्या भी बढ़ रही है.

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