JOINT FAMILY में रहने की 5 ख़ासियतें जो LIFE में खुशी दोगुनी कर देगी

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प्रियंवदा सहाय:

कहते हैं आज की दौड़ धूप भरी ज़िंदगी औऱ बढ़ रही महंगाई के दौर में छोटा परिवार ही ठीक है, लेकिन क्या आपको मालूम है कि एक Joint Family उसे न्यूक्लियर फैमिली से कहीं बेहतर बनाती है. संयुक्त परिवार में रहते हुए तहजीब, रिश्तों की समझ, सम्मान, सहयोग बड़ों के प्रति इज्जत और छोटों के प्रति प्यार जैसी life के अमूल्य Values खुद ब खुद समझ में आ जाते हैं.

बड़ी बात है कि संयुक्त परिवार में रहने वाले बच्चों में छोटी उम्र में ही इन बातों की समझ बन जाती है जो भविष्य में उन्हें रिश्तों को संभाल कर रखने और अपनों के साथ प्यार से रहने की सीख देता है. इससे Life की खुशी दोगुनी हो जाती है.




Joint Family  में रहने की 5 ख़ासियतें 

1-इससे इंकार नहीं कर सकते कि छोटे परिवार में ज्यादा प्राइवेसी औरअकेले रहने का मौका ज्यादा मिलता है लेकिन जो देखभाल, प्यार और अपनापन बड़ों के साथ रहने में है उसकी कल्पना अकेले रहकर नहीं की जा सकती. यह प्यार आपको और आपके बच्चे दोनों को मिलता है. ज्यादा लोगों के बीच खुशी के पल बांटने का मजा ही कुछ और है. यदि आप बीमार पड़ते हैं या कोई मुश्किल आती है तो ऐसे में अकेलापन महसूस नहीं होता. भावनात्मक और आर्थिक तौर पर संबल भी मिलता है.

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2-घर के काम का बोझ अकेले कंधों पर नहीं होता. बल्कि सभी सदस्यों के सहयोग से रोजमर्रा के काम आसानी से निबट जाते हैं. ऑफिस और घर के काम के बीच खुद को खींचना नहीं पड़ता. साथ ही बच्चों के साथ समय गुजारने का समय भी मिल जाता है. यदि आप वर्किंग हो तो संयुक्त परिवार तो मानो आपके लिए वरदान है. आप बच्चों को दादा-दादी और परिवार के दूसरे सदस्यों के पास छोड़कर आसानी से ऑफिस जा सकती हैं. घर में दादा-दादी हो या नाना-नानी बच्चों को संभालने में आपको सहयोग ही मिलेगा. वहीं बच्चे की परवरिश की कई बातें जो आप नहीं जानती उसे भी समझने का मौका मिलेगा. 




3-अमूमन छुट्टियों में बच्चों को दादा-दादी के पास लेकर जाना पड़ता है, लेकिन सब साथ रहें तो किसी नई जगह घूमने जाने का प्लान बनाया जा सकता है. सब साथ घूमने जाएं तो उसका मजा ही कुछ और होता है.

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4-आपसी मनमुटाव हो जाने के बावजूद आप अपने पति के साथ ज्यादा देर तक नाराज नहीं हो सकती. घर में ज्यादा लोगों के बीच कुछ पल ऐसे जरुर आते हैं जिनमें नहीं चाहने के बावजूद एक साथ रहना ही पड़ता है जो Married Life को मजबूत बना देता है. वहीं आपसी प्यार भी बना रहता है. हां यदि बात ज्यादा बिगड़ जाए तो संभालने के लिए सास-ससुर और परिवार के दूसरे सदस्य हैं ना. अकेले रहने  पर पति-पत्नी को समझाने वाला कोई नहीं होता इसलिए मामूली बात भी कई बार बड़े झगड़े का रुप ले लेता है. 

5-बच्चों को अकेले परवरिश करने या दूसरे रिश्तेदारों के साथ सामाजिक और पारिवारिक रिश्ते निभाने में आप अकेली नहीं पड़ेंगी. कहीं शादी-ब्याह या किसी और कार्यक्रम में जाना है और यदि आप और आपके पति ऑफिस में छुट्टी नहीं मिलने के कारण नहीं जा पाएं तो आपके परिवार का कोई भी सदस्य उस कार्यक्रम में शिरकत कर सकता है. इससे पारिवारिक रिश्तों को निभाने में भी कोई दिक्कत नहीं आएगी.




संयुक्त परिवार में रहने के फायदे-फायदे हैं. बस जरुरत है आप घर के दूसरे सदस्यों के साथ भी उसी प्यार, सम्मान, समझदारी और तालमेल के साथ रहें जिस तरह आप अपने पति और बच्चों के साथ होती हैं.

 

 

 

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