LEGAL DECISIONS की नज़र से महिलाओं के लिए कैसा रहा वर्ष 2017?

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Legal Decisions
Legal Decisions in the year 2017

संयोगिता कंठ:

हर साल कुछ लेकर जाता है और कुछ देकर जाता है. वर्ष 2017 भी कुछ अच्छी बातें देकर गया तो कुछ बुरी यादें. महिलाओं की बात करें तो उन्हें अपनी सेफ्टी को लेकर चिंता बनी रही. घर हो या बाहर या ऑफिस या कोई Public Place हर जगह उन्हें एक डर सताता ही रहता है. लेकिन  फिर भी कुछ फैसले और निर्णय ऐसे रहे जो महिलाओं के पक्ष में रहे. आईए Legal Decisions के नजरिए से वर्ष 2017 में झांकते हैं.




1-तीन तलाक़ पर कानून बनाने के लिए विधेयक लोकसभा से पास

Loksabha28 दिसंबर 2017 का दिन मुस्लिम महिलाओं के लिए ऐतिहासिक रहा. एक बार में तीन तलाक़ पर रोक लगाने के लिए इससे संबंधित विधेयक लोकसभा से पास हो गया.




अब यह विधेयक राज्यसभा से पारित होगा. विधेयक के कानून की शक्ल लेते ही एक साथ तीन तलाक़ कहने पर पति को तीन साल तक की जेल हो सकती है यानी इस कानून दंडात्मक श्रेणी में रखा गया है. ऐसा करने वालों के खिलाफ जुर्माने का प्रावधान भी है.




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इसी साल अगस्त में तीन तलाक पर सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यों वाली संविधानिक पीठ ने बहुमत से तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया और सरकार को 6 महीने के भीतर कानून बनाने के लिए कहा था.

2-Minor Wife के साथ सेक्स भी रेप के समान

Minor Wifeअक्तूबर में सुप्रीम कोर्ट ने बच्चियों के हक़ में एक बड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा है कि 15-18 साल की Minor Wife  के साथ सेक्स किया तो यह रेप माना जाएगा. कोर्ट ने कहा है कि शारीरिक संबंध बनाने की उम्र सीमा घटा नहीं सकते.

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15 से 18 साल की पत्नी के साथ संबंध बनाने को रेप नहीं मानने संबंधी कानून रद्द करने की मांग से जुड़ी याचिका पर कोर्ट ने यह फैसला दिया.  कोर्ट ने कहा कि शारीरिक संबंधों के लिए उम्र 18 साल से कम करना असंवैधानिक है और यदि पति  15 से 18 साल की पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाता है तो रेप माना जाए.

3-Abortion के लिए पति से इजाजत लेना जरुरी नहीं

इसी साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने शादीशुदा महिलाओं के हक़ में एक बड़ा फैसला दिया. कोर्ट ने कहा कि महिला यदि Abortion कराना चाहती है तो  इसके लिए पति से इजाजत लेना जरुरी नहीं.

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एक याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चे को जन्म देने वाली मां व्यस्क होती है. वह बच्चे को जन्म देना चाहती है या नहीं यह अधिकार उसका है. इसके लिए पति से इजाजत लेना जरुरी नहीं.

4- मध्यप्रदेश में 12 साल की बच्ची से रेप पर फांसी

छोटी बच्चियों के साथ दुष्कर्म के बढते मामलों को देखते हुए पहली बार मध्य प्रदेश सरकार ने 12 साल तक की बच्ची से रेप के दोषी को फांसी देने वाला कानून मंजूर कर लिया है. सरकार ने विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू होने से एक दिन पहले एक कानून पास किया.

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5-निर्भया के दोषियों के फांसी की सज़ा बरकरार रही 

2012 में हुए निर्भया कांड के चारों दोषियों की फांसी की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा. मई, 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए निर्भया कांड को ‘सदमे की सुनामी’ बताया था. निर्भया के परिवार वालों ने फैसले पर संतोष जताया.

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