कौन है DEEPIKA SINGH RAJAWAT, किस बात के लिए मिली उन्हें धमकियां?

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Deepika Singh Rajawat
Deepika Singh Rajawat (Pik Courtesy: TOI )

जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आठ साल की बच्ची के साथ हुए रेप और मर्डर की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. हर तरफ उस बच्ची को न्याय दिलाने की मांग उठ रही है, लेकिन सच में उस बच्ची को न्याय दिलाने के लिए Deepika Singh Rajawat ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है.




कौन है Deepika Singh Rajawat और क्यों उन्हें धमिकयां मिल रही हैं?  जम्मू बार एसोसिएशन की धमिकयों और मुश्किलों की परवाह किए बिना वे कैसे आगे बढीं? इन सवालों का जवाब पाने के लिए जानते हैं उनके बारे में विस्तार से…

दीपिका सिंह राजावत एक 38 वर्षीय वकील और सामाजिक कार्यकर्ता हैं. उनका एक एनजीओ ‘Voice of Rights’ और एक हेल्पलाइन है जो बच्चों और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर काम करता है.




मीडिया से बातचीत में दीपिका ने बताया कि मैनें भी बाकी लोगों की तरह इस केस और पुलिस जांच के बारे में सुना था. मैं बच्ची के पिता के पास फरवरी में पहुंची और कानूनी मदद देने की बात कही.  उन्हें बताया कि हम चाहें तो हाई कोर्ट में आवेदन देकर क्राइम ब्रांच में केस ट्रांसफर करा सकते हैं.

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दीपिका सिंह रजावत ने मीडिया को बताया कि जब यह केस उन्होंने अपने हाथ में लिया तो उन्हें जम्मू-हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से सीधे तौर पर धमकी मिली क्योंकि मैं उनका हिस्सा नहीं हूं. उन्होंने क्राइम ब्रांच द्वारा दाखिल चार्जशीट के खिलाफ हड़ताल कर उसका विरोध भी किया.




इस बात का जिक्र उन्होंने 5 अप्रैल को लिखे अपने फेसबुक पोस्ट में किया है. अपने पोस्ट में दीपिका ने लिखा- जम्मू कश्मीर कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह सलाठिया ने उन्हें धमकी दी है कि और कोर्ट में नहीं आने को कहा है.

दीपिका ने इस धमकी की शिकायत की और उन्हें सुरक्षा दी जा गई. वे इस मामले को लेकर महिला आयोग की अध्यक्ष से भी मिलीं.  उन्होंने अपने दूसरे पोस्ट में यह भी लिखा कि वे इस तरह  ट्रायल कोर्ट के लेडीज बार रुम के स्टाफ को उन्हें पानी तक देने से मना किया गया है.

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दीपिका इन धमकियों से नहीं डरीं और एक याचिका दायर की. जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने इस केस की निगरानी शुरु कर दी. बाद में क्राइम ब्रांच ने इस मामले को अपने हाथ में लिया.

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उन्हें भारत की पूर्व अडिशनल सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंग के साथ काम करने का मौका मिल चुका है. जब 2014-15 में महिला अधिकारों पर काम करने के लिए 15 वकीलों को चुना गया था वे इसका हिस्सा बनीं.

दीपिका का कहना है कि 2012 में जम्मू बार एसोसिएशन ने उन्हें बाहर कर दिया गया था क्योंकि वे 12 साल की कामवाली के लापता होने का केस लड़ रही थी. वह केस अब बंद हो गया है और सभी सबूत मिटा दिए गए हैं.

उनकी पांच साल की बेटी है. उनके पति पहले सेना में थे और अब वह बहरेन में काम करते हैं. वे यहां अपनी बेटी के साथ रहती हैं.

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