भगवान शिव की नगरी UJJAIN के बारे में जानिए ये खास बातें…

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कविता सिंह:

भगवान शिव की नगर Ujjain के बारे में कौन नहीं जानता और कौन यहां नहीं जाना चाहता? यह मध्य प्रदेश के साथ-साथ हमारे देश का प्रमुख धार्मिक शहर है. भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ‘महाकालेश्वर’ इसी नगरी में हैं. हमने बात की उज्जैन के एस्ट्रोलॉजर नितिन उपाध्याय से और उनसे जानी उज्जैन से जुड़ी कुछ खास बातें.

नितिन बताते हैं, ‘उज्जैन से कर्क रेखा गुजरती है. उसी कर्क रेखा पर महाकाल ज्योतिर्लिंग स्थापित है. महाकालेश्वर एक मात्र ज्योतिर्लिंग है जो दक्षिण मुखी है। उज्जैन उन हरिद्वार, नासिक और इलाहबाद के बाद चौथा शहर है जहां 12 साल में एक बार सिंहस्थ महाकुंभ मेला लगता है.

उज्जैन मंगल ग्रह का जन्म स्थल है. संसार में एक मात्र मंगल ग्रह का मंदिर उज्जैन में है, जिसकी पूजा से मांगलिक दोष दूर होता है. उज्जैन में कालभैरव का प्रसिद्ध मंदिर है, जो तंत्र के देवता हैं, महाकाल के सेनापति हैं.

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यहां भगवान भैरव को शराब का भोग लगता है. भगवान कृष्ण ने अपनी शिक्षा उज्जैन में सांदीपनि ऋषि के आश्रम में पूरी की थी. उज्जैन की राजकुमारी मित्रवृंदा उनकी आठ रानियों में से एक थीं.

सम्राट अशोक की राजधानी उज्जैन रही है। यहीं से उन्होंने अपने बेटे महेंद्र और बेटी संघमित्रा को बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए श्रीलंका भेजा था.

राजा विक्रमादित्य उज्जैन के ही राजा थे. जिनकी विक्रम बेताल और सिंहासन बत्तीसी की कहानियां प्रसिद्ध हैं. उज्जैन को कालगणना का केंद्र माना जाता है. इसे प्राचीन भारत का ग्रीनविच भी कहते हैं. वराह मिहिर और आर्यभट्ट जैसे पंडितों ने यहां ज्योतिष और कालगणना पर शोध किया है.

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संस्कृत के महाकवि कालिदास भी उज्जैन में रहे हैं और यहां उन्होंने अपने सात प्रसिद्ध ग्रंथों की रचना की. अभिज्ञानशाकुंतलम्, मालविकाग्निमित्रम्, मेघदूतम्, ऋतुसंहारम्, रघुवंशम् जैसे महान ग्रंथ कालिदास ने उज्जैन में ही लिखे. मैं तो यही सलाह दूंगा कि इस ऐतिहासिक नगरी को जिंदगी में एक बार जरुर देखें. ’

…तो देर किस बात की अगर आप भी इस साल उज्जैन जाकर भगवान शिव के दर्शन कीजिए.