सावधान! KITCHEN UTENSILS में भी छुपी होती हैं बीमारियां

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Non stick utensils
Non stick cookware

कविता सिंह:

किचन में बर्तनों का खास महत्व है. खाना पकाने से लेकर रखने तक के लिए हम तरह-तरह के बर्तनों का उपयोग किचन में करते हैं. लेकिन क्या आपको पता है आजकल यूज किये जाने वाले नॉन स्टिक, एल्युमिनियम,  पीतल, तांबे और स्टील के utensils भी आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं. जी हां, कुछ स्टडीज में भी यह बताया गया है कि किचन में मौजूद utensils भी आपकी हेल्थ पर सीधा सीधा असर डालते हैं तो जानते हैं इनके बारे में…




नॉन स्टिक कुकवेयर: 

इजी टू यूज और इजी टू क्लीन नॉन स्टिक utensils आजकल की महिलाओं की पहली पसंद हैं. हर महिला अपने किचन में कढ़ाई से लेकर तवे, फ्राइंग पेन में नॉन स्टिक को ही ज्यादा तवज्जो देती हैं. लेकिन क्या आपको पता है भले ही इनमें कम तेल लगने का दावा किया जाता है लेकिन ये नुकसान भी कम नहीं पहुंचाते हैं. बहुत देर तक इनमें कुकिंग करने से पॉलिटेट्राफ्लूरो इथेलिन केमिकल निकलता है जो कि बहुत ही नुकसान दायक है. इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते  हैं कि इनमें खाना बहुत देर तक न पकाएं, धीमी आंच पर पकाएं क्योंकि टेफ़लॉन कोटिंग के साथ आने वाले इन कुकवेयर्स से निकलने वाला केमिकल घातक साबित होता है. 




स्टील के बर्तन
स्टील के बर्तन

स्टील के बर्तन:

ये बर्तन तीन मेटल कार्बन, क्रोमियम और निकल से मिलकर बने होते हैं. सस्ते होने के कारण इनका यूज हर घर में बहुत ही ज्यादा किया जाता है. यह काफी सस्ते होते हैं लेकिन बहुत तेज आंच पर खाना पकाने में स्टील में मौजूद कैमिकल भी रियेक्ट करने लगते हैं जिससे आपकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है.




एल्युमिनियम के बर्तन:  

ये बर्तन बॉक्साइट से बने होते हैं और आयरन, कैल्शियम को सोखने के कारण काफी नुकसानदायक होते हैं इसलिए एल्युमिनियम से बने बर्तन कम से कम उपयोग किए जायें तो बेहतर है. एल्युमिनियम नमक और एसिड के साथ मिलने पर पिघलने लगता है, जिससे खाने में इसका अंश भी शामिल होता जाता है.. यह हड्डियों की बीमारियों का कारण बन जाता है. मानिसक रोगों के अलावा, टीबी और किडनी संबंधी रोग भी इससे होते हैं. 

तांबे और पीतल के बर्तन
तांबे और पीतल के बर्तन

तांबे और पीतल के बर्तन: 

शादी और पार्टियों में तांबे के बर्तन का इस्तेमाल भी काफी किया जाता है. तांबे के बर्तनों के ज्यादा इस्तेमाल से डायरिया, उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. कुछ तांबे और पीतल के बर्तनों पर दूसरे मेटल की लेयर चढ़ी होती है, जो कॉपर को खाने में शामिल होने से बचाता है. लेकिन जब ये कोटिंग हटने लगती है तो कॉपर का अंश खाने में पहुंचने लगता है. इसका इस्तेमाल बहुत ही ज्यादा नुकसान पहुंचाता है. 

 

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