KING AND PROSPERITY- नेकी पर चले, और बदी से टले…

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राजा और समृद्धि
राजा और समृद्धि

प्रेरणा चतुर्वेदी:

King and Prosperity-एक बड़ा ही भला राजा था. वह अपनी प्रजा  पूरा ध्यान रखता था. प्रजा को कोई परेशानी होती तो तत्काल उसका हल निकालने में लग जाता. फिर चाहे दिन हो या रात.

एक बार राजा शिकार खेलने जंगल गया. शिकार की तलाश में घूमते-घूमते उसे बड़ी देर हो गई. वह थक गया. उसे प्यास सताने लगी. दूर उसे एक गांव दिखाई पड़ा.करीब जाने पर उसने देखा कि एक बुज़ुर्ग महिला अपने गन्ने के खेत में बैठी है.




थका-हारा राजा वहां पहुंचा और बुढ़िया से कहा, ‘माई, मैं बहुत प्यासा हूं. एक गिलास पानी दे दो.’ बुढ़िया उठी, उसने एक गन्ना तोड़ा और उससे रस निकालकर गिलास में राजा को दे दिया. राजा ने झटके में पूरा गिलास खाली कर दिया.

गन्ने का रस बहुत स्वाद भरा था. राजा ने कहा, ‘माई, अभी प्यास नहीं बुझी, एक गिलास और दे दो.’ बुढ़िया फिर से रस निकालने लगी. राजा के दिल में आया कि यह खेत तो बड़ा उपजाऊ है. बढ़िया फसल होती है. एक गन्ने में एक गिलास भर गया, पर बुढ़िया लगान नहीं देती होगी.




उसने पूछा, ‘माई, इस खेत का लगान कितना देती हो?’ बुढ़िया ने कहा, ‘हमारा राजा बहुत अच्छा है, लगान नहीं लेता.’ ये जवाब पाकर राजा सोचने लगा कि बुढ़िया बहुत चालाक है. सारा मुनाफा खुद ले जाती है. इस पर मैं कर लगाऊंगा.

इस बीच बुढ़िया ने एक गन्ना तोड़ा, दो तोड़े, तीन तोड़े, लेकिन गिलास नहीं भरा. राजा को अचरज हुआ. उसने बुढ़िया से पूछा, ‘माई, यह क्या हुआ? पहले एक गन्ने से गिलास भर गया था, अब तीन से भी नहीं भरा.




क्या गड़बड़ हो गई?’ बुढ़िया ने जवाब दिया, ‘ऐसा लगता है कि हमारे राजा की नीयत में बदी आ गई है.’ राजा को तुरंत बुढ़िया की बात समझ आ गई. अगर किसी की नीयत में बदी आ जाती है तो फिर कुदरत का असल संदेश यही होता है कि उसके पास से समृद्धि जाती रहती है.