‘WOMEN’s DAY’- WHO AM I-स्त्री अभी भी इसका जवाब दूसरों से पाने के इंतजार में क्यों है?

547
Women's Day
International Women's Day- who am i- why finding answer from others
मोनिका अग्रवाल:
WHO AM I- यह प्रश्न अभी भी उत्तर की आस में क्यों खड़ा है? Women’s Day पर यह ख्याल आ रहा है कि हम क्यों इसका Answer दूसरों से मांगते हैं? जबकि जवाब हमारे अन्दर ही है. हम उसको सामने लाने में बहुत घबराए हुए क्यों हैं?  स्त्री को एक देह से अलग एक स्त्री के रूप में देखने की आदत को डालना होगा.
Women's Day

हम देखते-सुनते आए हैं सदियों से स्त्रियों का शोषण पुरुषों ने किया, लेकिन इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि स्त्री ने अपने उपर होने वाले हर ज्यादती को स्वीकार कर लिया. जैसा कि अरस्तू ने कहा है कि “यदि आप स्वंय को गधा घोषित कर देंगे तो सारी दुनिया अपना बोझ आपके ऊपर रख देगी.




READ THIS: WORKING MOTHER को क्यों नहीं होता खुद से भी प्यार?

इसलिए जरुरत है महिलाओं के जागृत होने की और उन सारे बोझ को उतार फेंकने की जो उसे झुका रहे है. उन्हें स्वयं सामने आना होगा स्वयं लड़ना होगा अपनी ज़रूरतों के लिए और अपने खिलाफ हो रहे अन्याय के लिए. अच्छा हो इसके लिए सबसे पहले हमारे घरों से ही शुरु हों.




सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि महिलाओं को खुद के प्रति नजरिया बदलना पड़ेगा. अभी दूसरों की बातें सुनते-सुनते वे भी अपनी क्षमताओं के प्रति सशंकित रहती हैं. उन्हें भी लगने लगता है कि उनमें कोई काबिलियत नहीं है.

सबसे अहम बात जो हम भूल रहे हैं यदि महिलाओं को अपनी क्षमता के इस्तेमाल का उचित अवसर नहीं मिला तो समाज और देश का विकास बहुत प्रभावित होगा.




मनोवैज्ञानिक तौर और कई शोध में इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि महिलाएं किसी भी पोस्ट पर पुरुषों से बेहतर मैनेजर साबित होती हैं. सिर्फ मैनेजर ही नहीं बल्कि किसी भी काम को बेहतर ढंग से करने की काबलियत महिलाओं में पुरुषों से अधिक होती है.

MUST READ: महिलाओं के कंधों पर ही क्यों है HOUSE WORK की ज्यादातर जिम्मेदारियां?

मोनिका अग्रवाल

शोध बताते हैं कि महिलाएं दी गई जिम्मेदारियों को न केवल समयसीमा के भीतर खत्म करती हैं, बल्कि उस काम की क्वालिटी भी बेहतरीन होती है. एसोचैम और अन्य संगठनों की रिपोर्ट में भी इस बात को माना गया है. अब जरूरत है तो केवल इस बात की हम बिना किसी हिचक के इस बात को खुले दिल से स्वीकार करें.

खुद को सशक्त और जागरुक बनाने के लिए मानसिक तौर पर तैयार होने की जरूरत है. हर इंसान की अपनी एक पहचान होती है उसे निखारें. भारतीय महिलाएं और इनके इस स्वरूप को आज पूरी दुनिया ने स्वीकार किया है लेकिन पहले खुद को स्वीकारें.

महिलाओं से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करेंट्विटर पर फॉलो करे… Video देखने के लिए हमारे you tube channel को  subscribe करें