इस लाइफस्टाइल में कैसे रखें बच्चों को MENTALLY-PHYSICALLY हमेशा फिट

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Mentally Physically
Tips for parents-how to keep child mentally physically fit

मोनिका अग्रवाल:

तेजी से बदलती जीवनशैली में यह एक बड़ा और गंभीर सवाल है कि बच्चों को  Mentally-Physically फिट कैसे रखें? यह बात लगभग बड़ी संख्या में पैरेंटस को परेशान कर रही है और सभी को प्रभावित कर रही है.

बदलते लाइफस्टाइल और वक्त की कमी से सिर्फ आप ही नहीं बल्कि बच्चे भी अछूते नही है. ऑफिस की व्यस्तता और मल्टीटास्किंग से सिर्फ आप ही नहीं  परेशान हैं बल्कि समय की कमी, होमवर्क, पढ़ाई का प्रेशर उनको भी सताता है‌.




ये तमाम बातें आप के अलावा आप के बच्चों को भी परेशान करती हैं जिसकी वजह से वे अकसर  चिड़चिड़े और आलसी हो जाते हैं और आप की बात नहीं मानते हैं. उन्हें छोटी-छोटी बातें समझाने में भी दिक्कत आती है. पेरैंट्स होने के नाते आप परेशान हो जाते हैं.

ऐसे में विशेषज्ञों की राय काफी महत्त्वपूर्ण हो जाती है. खासतौर से कामकाजी पेरैंट्स के लिए यह किसी चुनौती से कम नहीं कि वे अपने छोटे या बढ़ते बच्चों को कैसे समझाएं या उन के साथ कैसे Deal करें और उन्हें किस तरह Mentally Physically फिट रखें.




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क्या आप ये जानते हैं कि बच्चों के मस्तिष्क का विकास बचपन में अत्यधिक तेज़ी से होता है? 6 वर्ष की आयु तक उनके मस्तिष्क का विकास अपने वयस्क आकार का लगभग 90%हो जाता है.

यह प्रक्रिया किशोरावस्था के दौरान सबसे अधिक तेज़ी से होती है. 6 से 14 साल की उम्र तक के बच्चों में बहुत से शारीरिक और मानसिक बदलाव होते हैं. जिस कारण बच्चों के स्वभाव में भी परिवर्तन आता है।

मैक्स सुपरस्पेशिलिटी हॉस्पिटल नोएडा के सीनियर कंस्लटेंट डॉ शिशिर भटनागर की इन बातों पर गौर फरमाइए जो बच्चों को मानसिक और शारीरिक तौर पर फिट रखने में मदद करेंगी:




1-बच्चों को एक्सरसाइज करने के लिए प्रोत्साहित करें

बच्चे को एलिवेटर ब्रीदिंग यानी गहरी सांस लेने को कहेंयह आसान सी एक्सरसाइज बच्चों के लिए बहुत उपयोगी है एक शांत जगह पर बैठें. अपनी आंखें बंद करें और कम से कम 15 मिनट की गिनती तक गहरी सांसें लें. उसी प्रकार जैसे एलिवेटर पर चढ़ते समय ली जाती हैं.

Pik Cour: Yoga Journal

गहरी सांस लेने से शांति का अनुभव होता है और बच्चों के मस्तिष्क को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है. दूसरी उपयोगी शारीरिक कसरत करने में बच्चों को कोई परेशानी भी नहीं होगी और एंजॉय भी करेंगे.

2-अपने जॉगिंग के जूते पहनें और उनके साथ 20 मिनट के लिए वॉक पर निकल जाएं. व्यायाम से  शरीर में खुशी पैदा करने वाले हॉर्मोन्स निकलते हैं.

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3-कुर्सी पर बैठकर और पैरों को फर्श पर सीधा रखें. अपने बाएं पैर को ऊपर उठाएं और उसके अंगूठे के सहारे हवा में सर्कल बनाते हुए उसे 15-20 बार दाएं से बाएं घुमाते रहें. अब बाएं पैर के अंगूठे को 15-20 बार उल्टी दिशा में यानी बाएं से दाएं घुमाएं.  फिर यही प्रक्रिया दाएं पैर से भी दोहराएं.

मोनिका अग्रवाल

4-अपने पैर की उंगलियों ऊपर नीचे करें. उसके बाद अपने अंगूठे और छोटी उंगली को पकड़कर ऊपर नीचे करें. ऐसा कम से कम 4 बार करें. इसके बाद अपने अंगूठे और अन्‍य उंगलियों को जितना व्‍यापक रूप से फैला सकते हैं फैलाएं और वापस लेकर आएं.

ऐसा चार-पांच बार करें यह एक्‍सरसाइज पैर की उंगलियों को मजबूत करेगी और अपने पैर की उंगलियों की ताकत और लचीलेपन में वृद्धि करेगी.

5-पैरों की उंगालियों से जमीन को पकड़ें और छोड़ें. इस एक्‍सरसाइज को 4 बार दोहराएं. प्रतिदिन इस एक्‍सरसाइज को कुछ मिनट करना चाहिए. किशोर बच्चे अपने संतुलन और लचीलेपन में सुधार को महसूस कर सकेंगे. यह व्‍यायाम करने में  मजा भी बहुत आएगा.

2.एकाग्रता गेम

स्मृति और एकाग्रता में सुधार के लिए किशोरों  के सामने कुछ ऑब्जेक्ट को 15 सेकंड के लिए रखें फिर उस ऑब्जेक्ट को हटा दें और देखें कि वे कितने याद कर सकते हैं. पांच के साथ शुरुआत करें और संख्या बढ़ाती रहें. बच्चों को अगर पेंटिंग का शौक  है तो उनसे पूछें कि कौन से 2 या 4 रंग मिलाने पर कौन सा नया रंग बनता है.

3.फैमिलीगेम्स 

चेकर्स और शतरंज जैसे खेल खेलें. बोर्ड वाले खेलों से एकाग्रता, समन्वय और हताशा सहनशीलता में सुधार होता है. एक और बात यह है कि एक साथ खेलना हर किसी के लिए मजेदार है और परिवार के बंधन को मजबूत करने में मदद करता है. सप्ताह में एक बार कोशिश करें और देखें कि यह आपके बच्चे और आपके रिश्ते के लिए क्या करता है?

4.चलायें ऑनलाइन गेम्स

बहुत सी वेबसाइटें मुफ्त गेम की पेशकश देती हैं जो मज़ेदार और शैक्षिक योग्यता बढ़ाते हैं. ये सब बच्चे के मानसिक कौशल में सुधार कर रहे हैं. पर ध्यान रहें कि बच्चे केवल इसी गेम में न लग जाएं.

5.ऑल इज़ वेल

बच्चों को समझाएं कि सभी प्रश्नों के उत्तर ढूंढने की कोशिश न करें. याद रखें कि उदासी और चिड़चिड़ापन सामान्य जीवन के लक्षण हैं. इसलिए अपने आप को तनाव में न रखें. मुस्कुराएं और अपने आप से कहें, “सब ठीक है! आल इज़ वेल”

6-डायरी लिखवायें

(Pik Cour: nameberry.com)

बच्चों को रोज़ाना डायरी लिखने के लिए प्रोत्साहित करें. डायरी लिखने से मन के भावों को निकालने का एक सरल और शांतिपूर्ण माध्यम मिल जाता है. खासतौर पर तब जब बच्चे का मूड खराब हो. अपनी पसंद के म्यूज़िक सुनने से भी बच्चों का मूड बेहतर होता है.

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7.भावनाओं की अभिव्यक्ति

बच्चों को अपने मन की बात कहने से नहीं रोकें. उन्हें अपने मन की बात कहने दें.  किसी विश्वसनीय, किसी दोस्त, अपने माता या पिता या किसी अंकल/आंटी को अपने मन की बात बताने से भी बच्चों को अपनी उलझन को सुलझाने और किसी मुश्किल का हल मिल जाता है. भावनाओं को अभिव्यक्त करने और बोलने से मन भी शांत होता है.

8-डेली टॉक टाइम

वैसे तो बच्चों से दिनभर बात करें लेकिन परिवार का डिनर टाइम सब के लिये उपयोगी समय है. अपने बच्चे के साथ  किताब पढ़ना और क्या हो रहा है इसके बारे में सवाल पूछने, घटनाओं और भावनाओं पर भी चर्चा करने का यह बेहतर समय है.

इस समय बच्चे के साथ दिनभर की बातें करने से आप जान जाएंगे कि आपका बच्चा क्या सोच रहा है और क्या महसूस कर रहा है? अपने विचारों और भावनाओं को भी साझा करें.

(Pik Courtesy: lolamagazin.com)

इन गतिविधियों में बच्चे को शामिल होने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करें और आप खुद भी इसमें भाग लें. इससे एक तरफ जहां बच्चे Mentally Physically फिट रहेंगे वहीं आपके साथ उसके रिश्तों में भी ऊर्जा बनी रहेगी.

बच्चों के खेल में आप भी शामिल हों यह आपके बच्चे के मानसिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है. बच्चे के मन के भावों को पहचानें और उन्हें नियंत्रित रखने कि कोशिश करें जिससे कि वे खुशहाल और सुखद किशोरावस्था का आनंद उठाएं.

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