कैसे पहचानें कि वह SILENT DOMESTIC VIOLENCE शिकार हो रहीं?

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Silent Domestic Violence
Victim of silent domestic violence (Representional Image)

संयोगिता कंठ:

Domestic Violence या घरेलू हिंसा का ख्याल आते ही हमारे आंखों के सामने एक ऐसी महिला का चेहरा घूम जाता है जिसके साथ अक्सर मारपीट होती है, उसके शरीर पर चोट के निशान हों या जख्म हो या दर्द हो और आंखों में आंसू हो.




शरीर पर लगे जख्म या निशान को तो हम देख लेते हैं लेकिन कई बार कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो चेहरे पर भी प्रकट नहीं किए जाते. मारपीट घरेलू हिंसा का चरम रुप है लेकिन यह केवल मारपीट नहीं है बल्कि शब्दों और व्यवहारों से भी ऐसी हिंसा की जा सकती है.

silent domestic violence
silent domestic violence (Representional Image)

हो सकता है ‘वह’ बेशक शारीरिक प्रताड़ना या हिंसा का शिकार नहीं हो रही, उसके मुंह से चिल्लाने या कराहने की आवाज नहीं आती, उनके शरीर पर आपको चोट या कोई निशान नहीं दिख रहे लेकिन उनके मन पर चोट हो रहा है, जिसके गहरे घाव किसी को नहीं दिख रहे.




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यदि आप मदद का हाथ बढ़ाएं तो हो सकता उनके मन का डर कुछ हद तक कम हो जाए….

पहचानिए कहीं आपके आसपास कोई ऐसा तो नहीं जो Silent Domestic Violence का शिकार हो रही हैं?

1-उन्हें हमेशा किसी से इजाजत लेने की जरुरत पड़ती है. मसलन पत्नी को छोटे घरेलू फैसले लेने से पहले भी पति से बार-बार पूछना पड़े. या सास को पोते-पोतियों को कुछ खिलाने से पहले बहू की इजाजत लेनी पड़े और ऐसा नहीं करने पर उन्हें डर लगे.




2-छोटी ग़लती होने पर वह हमेशा माफी मांगे. स्वंय के साथ ऐसा बर्ताव करे मानो वह अपराधी हो. समय पर कपड़े नहीं धुले या खाना नहीं बना या सब्जी ताजी नहीं खरीदी तो घर में अपने साथ बुरा बर्ताव होने का डर लगे.

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silent domestic violence (Representional Image)

3-दादी के साथ पोती पार्क में खेलने गई हो और बच्चे को मामूली चोट लग जाए तो वह बार-बार बेटे-बहू से माफी मांगे. बच्चों की प्रतिक्रिया से ज्यादा भयभीत हो जाए और उनके चेहरे का रंग उड़ जाए.

4-अपनी बात कहते हुए डरे, आशंकित रहे कि लोग क्या प्रतिक्रिया देंगे, अपने मन की बात नहीं कहे, बार-बार सफाई दें तो समझे कि कुछ ग़लत है.

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5-घर पहुंचने में थोड़ी देर हो जाए तो घबराहट के मारे जान निकलने लग जाए, तनाव के कारण कांपने लग जाए तो जरुर चेक करना चाहिए कि उनके साथ सब ठीक तो है?

6- यह जानते हुए भी आप ग़लत बात कह रहे हैं आपकी बात को चुपचाप सुन लें या किसी तरह का विरोध नहीं करे तो तो उनके इस मौन के कई मतलब है.

7-कुछ भी खर्च करने से डरे. या उनके बैग में पैसे नहीं हो. वह छोटे-मोटे खर्चों के लिए बार-बार किसी से चिरौरी करें. बीमार होने पर खुद डॉक्टर या हॉस्पिटल जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए.

8-आत्मविश्वास डगमगाया हुआ हो, किसी से अपनी दिल की बात शेयर नहीं करे. आपको महसूस हो कि वह सामने वाले का सम्मान नहीं करती बस डरी हुई हैं तो ऐसे लोगों से जरुर बात कीजिए.

 

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