MOTHER- DAUGHTER के बीच दोस्ती मजबूरी या फिर वक्त की जरूरत?

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Mother Daughter
friendship between mother daughter is necessity or compulsion (Pik Courtesy: The Asian Age)

सुमन बाजपेयी:

Mother-Daughter का रिश्ता भावनात्मक तौर पर इस तरह जुड़ा होता है कि वे एक-दूसरे के साथ हर चीज शेयर करती हैं. मां-बेटी का रिश्ता पिता-पुत्री के रिश्ते की तरह पूर्ण सम्मान पर ही नहीं टिका होता है, वरन अपेक्षाओं व कई बार आपसी प्रतिस्पर्धा पर टिका होता है.




एक मां अपनी बेटी को अपनी उम्मीदों व आशाओं की कड़ी या विस्तार के रूप में देखती है. उसके साथ उसकी अपनी महत्वाकांक्षाएं जुड़ी होती हैं और बेटी उन महत्वाकांक्षाओं को समझ भी लेती है.

कंपीटशन करने लगती है

यही वह रिश्ता है जिसमें जटिलता भी कम नहीं होती. जटिलताएं तब उत्पन्न होती हैं जब वयस्क होती बेटी अपनी मां से किसी बात पर कंपीटशन करने लगती है. उसे मां की खूबसूरती, उसकी प्रतिभा या फिर लोगों का उसकी तारीफ करना ही खटकने लगता है.

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अचानक तब वह अपनी ही मां से दूर छिटकने लगती है और कई बार तो उसे वह अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानने लगती है. हालांकि आज के दौर में जब शिक्षित मां अपनी बेटी की जरूरतों और ख्वाहिशों को बखूबी समझने की क्षमता रखती है.




ऐसी स्थितियों के उत्पन्न होने में कमी अवश्य आई है और Mother-Daughter के बीच एक दोस्ताना संबंध कायम हो गया है. लेकिन कहा जाता है कि मां को मां ही बने रहना चाहिए. दोस्ती का रिश्ता बेटी के साथ कायम नहीं करना चाहिए. क्योंकि ऐसा करने से बेटी मां का न तो वह सम्मान कर पाती है और न ही डर रहता है.

रोल मॉडल होती है

बदलते समाज में इस रिश्ते में भी कई बदलाव आए हैं और निरंतर आ भी रहे हैं, ऐसे में यही सवाल उठता है कि क्या मां का बेटी से दोस्ती करना उसकी मजबूरी है या वाकई जरूरत है? मां बेटी की जिंदगी संवारने वाली नींव होती है और उसकी रोल मॉडल भी.

Mother Daughterवह उसका मार्गदर्शन करती है और बंधन भी लगाती है. वह बेटी के मन में अपने लिए पनपते विद्रोह को भी झेलती है और उसकी हर गलती को माफ करती जाती है. ऐसी स्थिति में मां का बेटी के साथ दोस्ताना रिश्ता कायम करना मजबूरी नहीं है, बल्कि अनिवार्यता है.




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यही एकमात्र ऐसा रिश्ता है जहां तमाम मतभेदों के बावजूद दोनों एक-दूसरे की केयर करती हैं. एक-दूसरे का दर्द समझती हैं, इसलिए मां होने की तमाम जिम्मेदारियों को निभाने के साथ मां का बेटी का दोस्त बन उसे गाइड करना बेहतर होगा.

Mother Daughterदोस्त बनने के लिए मां को अधिकार जताने के बजाय उसका विश्वास जीतना होगा. उसके दिल को जीतना होगा, ताकि वह बिना हिचके हर बात मां के साथ शेयर कर सके. ऐसा व्यवहार रखने से उन दोनों की ही जिंदगी बहुत सहज हो सकती है.

कंट्रोल न करें
सुमन बाजपेयी

बेटी को अकसर मां से यह शिकायत रहती है कि उसकी मां उसे समझना ही नहीं चाहती, ऐसा तभी होता है जब मां उसे कंट्रोल करने की कोशिश करती है. जहां पुरानी परंपराओं का निर्वाह करने के कारण मां बेटी को बात-बात पर टोकती है, वहां उनके बीच कभी मधुर संबंध बन ही नहीं पाते हैं.

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र्फोटिस ला फेम होस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट बिहेवियरल फिजीशियन डा. स्वाति कश्यप के अनुसार, ‘‘इसमें कोई संदेह नहीं कि मां और बेटी के बीच सबसे गहरा रिश्ता होता है, लेकिन हमेशा ही ऐसा हो ऐसी अपेक्षा रखना भी गलत है. आखिरकार वे अलग-अलग ढंग से सोचती हैं और उनके बीच जेनरेशन गैप भी होता है.

Mother Daughterबेटी जब बड़ी हो जाती है तो वे दो अलग-अलग औरतें भी बन जाती हैं. बेहतर होगा कि इससे पहले आपकी बेटी आपको ही अपना दुश्मन या प्रतिद्वंद्वी समझने लगे, आप उसके किशोर होते ही उसकी फ्रेंड बन जाएं.

उसे विश्वास दिलाएं कि आप उसके सीक्रेट्स को किसी और को नहीं बताएंगी, बल्कि खुद ही उसे परेशानियों से बाहर आने की राह सुझाएंगी. उसे स्पेस दें और उसकी स्पेस की रिस्पेक्ट करें.’’

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