उस NIGHT के इंतज़ार में बैठी है वो..

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husband wife friends
husband wife ' friends '

रोशनी रस्तोगी:

साइड टेबल पर चाय का कप रखते हुए उसने आवाज़ दी चाय ले लीजिए, उठ जाइए अब  और तेजी से किचन की तरफ जाने लगी. प्रियंका की आवाज़ में बेरुखी के साथ तल्खी और तल्खी के साथ शायद तकलीफ छिपी हुई थी. उसे समझते देर नहीं लगी कि प्रियंका का रात का गुस्सा अभी उतरा नहीं है.




शरारत भरे अंदाज़ में उसका हाथ पकड़ने की कोशिश की और प्यार से कहा – अजी, कहां जा रही हैं आप , करीब तो आइए. उसने हाथ झटकते हुए जवाब दिया- परेशान मत कीजिए अभी और जल्दी तैयार हो जाइए, आफिस नहीं जाना है क्या आज ?




आफिस आप से ज़्यादा ज़रूरी तो नहीं है जनाब, आइए तो सही, रवीश ने हाथ खींचते हुए एक हल्का झटका दिया तो वो लगभग सीधे गिर सी पड़ी बेड पर उसके सीने के करीब. उसके हल्के आसमानी गाउन में से बिना झांके ही अच्छा लगा … लेकिन नाराज़गी कम नहीं हुई लगती थी. वो फिर उठने को हुई ..अब छोड़िए ये रोमांस ..इसके सिवाय कुछ आता है आपको. स्वर में गुस्से से ज़्यादा खीझ थी. रवीश के दिल को चोट सी लगी, लेकिन माहौल बदलने की कोशिश की. चलो ..साथ-साथ चाय पीते हैं. वो बिना सुने किचन में चली गईं …




अगले महीने की दस तारीख को उनकी शादी को एक साल पूरा होने को था. तीन साल के अफेयर के बाद दोनों की शादी हुई थी. प्रियंका एमबीए के कोर्स में रवीश से एक साल जूनियर थी लेकिन एक डिबेट कॉम्पीटिशन में जब दोनों को एक साथ अवार्ड मिला तो वो अवार्ड ना जाने कब दोस्ती से प्यार में बदल गया पता ही नहीं चला. रवीश को एमबीए के बाद भुवनेश्वर में नौकरी मिल गई थी और वो लखनऊ में ही अपना एमबीए पूरा कर रही थी. एक साल तक वो आता जाता रहा लखनऊ क्योंकि उसका अपना घर भी वहीं था हज़रत गंज में. एमबीए पूरा करने के बाद प्रियंका ने महिलाओं के लिए कुछ काम करने का तय किया और एक कंपनी बना ली.

लखनऊ आता तो शाम को दोनों गोमती किनारे घंटों घूमा करते कभी वहीं आईसक्रीम खाते तो कभी गोमती नगर में ताज में पहुंच कर कॉफी पीते. उसका रूप शरबती था लेकिन रवीश उसके सीने पर अपना सिर रखता तो दीवाना हो जाता. बहुत प्यार करने का मन करता ..दोनों ने उन्हें “ friends ”  का नाम दिया था. शाम को कॉफी पीकर लौटते तो रवीश का एक हाथ स्टीयरिंग पर और दूसरा “ friends ” पर होता ..वो  उसके स्पर्श से मचलते रहते, उतावले से दिखते. वो भी अक्सर फोन पर कहती तुम्हें तुम्हारे “ friends ” याद कर रहे हैं.. गिफ्ट्स के नाम पर अक्सर रवीश अपने “ friends ” के लिए ही शॉपिंग करता. तरह-तरह की ब्रा उसने प्रियंका को गिफ्ट की, देश के नामी ब्रांड्स से लेकर विदेशी महंगे ब्रांड्स तक.  बड़े मॉल्स और बड़े शो रुम में भी उसे खरीदने में झिझक नहीं होती .. पंसद करता ,कलर्स, फेब्रिक और लेस , साइज 32 बी ..

भुवनेश्वर में कभी आफिस से ज्यादा थक कर लौटता या मूड खराब होता तो वो फोन पर भी भांप जाती थी. वो मोबाइल पर “ friends ” का जिक्र कर देती तो रवीश का मन और मूड एकदम तरोताजा हो जाता .एक बार तो उसने अपने फोन पर फेस टाइम करते हुए ही टॉप उतार दिया और बोली, मिल लो अपने “friends” से ..एक पल में लगा  कई सौ किलोमीटर की दूरी बांहों में सिमट गई, वो बहुत देर तक फोन पर ही उन्हें प्यार करता रहा.

हनीमून पर जब मॉरीशस गए तो समुंदर के किनारे रिसार्ट में पूरा वक्त उसने अपने “फ्रेंड्स” को ही प्यार करने में बिता दिया ..जब भी मिलते उन्हें तलाशते लगता..प्यार करने लगता ..बिग बाइट, स्माल बाइट..बिग बाइट , स्मॉल बाइट..सिलसिला यहां से शुरु होता और फिर पागलों की तरह लेफ्ट-राइट, लेफ्ट-राइट करने लगता कभी लेफ्ट तो कभी राइट ..वो छुड़ाने की कोशिश करती रहती लेकिन उस पर तो माने भूत सवार हो जाता. हनीमून खत्म हो गया लेकिन उससे आगे नहीं बढ़े उसने सोचा अभी शुरुआत है ..

वो भी अब भुवनेश्वर आ गई थी. बहुत अच्छी कॉलोनी में तीन बेडरुम का फर्नीश्ड घर मिला हुआ था, मेड सर्वेंट भी थे. सवेरे नाश्ता करके रवीश निकल जाता, लंच आफिस में होता था और प्रियंका दिन में वहां लोकल महिलाओं के साथ मिल कर उनके हैंडीक्राफ्ट के काम के लिए बिजनेस प्लान बनाती . शाम को दोनों अक्सर बाहर खाना खा लेते और देर रात तक लौटते. जब तक प्रियंका बाथरुम में वॉश लेकर और चेंज करके आती तब तक वो टीवी पर कुछ देख रहा होता. वो आते ही टीवी ऑफ कर देती.

रवीश हर बार सोचता कि आज उसे पूरा प्यार करूंगा, वो भी इंतज़ार कर रही थी. अब छह महीने बीत चुके थे लेकिन सही मायने में दोनों नहीं मिले थे पति पत्नी की तरह ..उसने कई बार पूछा भी कि क्या बात है, क्या तुम्हें पसंद नहीं हैं या कोई और बात है तुम्हारे मन में मुझे लेकर? कोई बात थी ही नहीं जो कहता लेकिन हर बार ..

नाइट लाइट ऑन होती और प्यार का सिलसिला शुरु होता फिर वहीं “फ्रेंड्स” से ..एक पल भी नहीं लगता था उसके पागलपन का नशा उतरने से पहले वो थक चुकी होती ..कहती मुझे छोड़ दो और फिर दोनों सो जाते करवट बदल कर ..

एक-दो बार उसने कहा कि आज “फ्रेंड्स” को हाथ भी नहीं लगाना है, पहले प्यार करेंगें ..अनमने मन से हामी भर दी, लेकिन प्यार करने की कोशिश सफल नहीं हो पाई. पता नहीं क्यों कोई कमी नहीं थी..वो मजाक में कहती भी कि गाड़ी परफेक्ट है, ड्राईवर ही कुछ अनाड़ी है ..

लखनऊ में उसकी मम्मी कई बार फोन पर पूछ चुकी थी खुशखबरी जानने के लिए..रवीश की भाभी भी अक्सर प्रियंका को फोन पर मजाक में चिढ़ाती रहती कि क्या हुआ भैया जी को फुर्सत नहीं है क्या ..वो मन मसोस कर रह जाती, किसी को क्या बताती अपना दुख..रवीश को समझ नहीं आ रहा था कि क्या वजह है..वो उसे बहुत प्यार करता था .

आज रात भी ऐसा ही हुआ ..खासतौर से तैयारी की थी प्रियंका ने. गुलाब के फूलों से गुलदान सजा हुआ था और कैंडल जल रही थी बेडरुम में. डिनर के बाद जब वो अपने पिंक लैस वाले गाउन में बेडरुम में आई तो उसे हल्के उजाले में भी भी उसे “फैंड्स” की आहट हो गई…आज तय कर लिया था कि उसकी मम्मी और अपनी भाभी को निराश नहीं करूंगा …प्रियंका ने प्यार से डीप किस किया था गालों पर और फिर सिलसिला शुरु हुआ …देर रात तक ..लेकिन जब घरवालों की इच्छा पूरी करने की बात आई तब तक उसका नशा शायद उतरने लगा था , कोशिश काम नहीं आई..वो गुस्से में करवट लेकर सो गई और  नींद तब खुली जब उसने चाय की प्याली रखी थी.