12th CLASS की बच्ची को क्यों देना पड़ा बच्चे को जन्म

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महाराष्ट्र के पुणे शहर में 12th Class में पढ़ रही एक  Rape Victim लड़की ने बेटे को जन्म दिया है. इस बच्चे को लड़की के माता पिता ने एक NGO को सौंप दिया है ताकि कोई उस बच्चे को गोद ले सके. लड़की के पिता का कहना है कि वे चाहते हैं कि बेटी इस बच्चे की ज़िम्मेदारी ना उठाए और ज़िंदगी में पढ़ लिख कर आगे बढ़े .

इस 17 साल की लड़की के पिता ने बेटी के 26 सप्ताह के गर्भ को गिराने के लिए दो महीने पहले  बाम्बे हाई कोर्ट में याचिका दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने बच्ची के स्वास्थ्य को देखते हुए और गर्भपात से उसकी ज़िंदगी को खतरे के आधार पर एबार्शन की इजाजत नहीं दी थी. बच्चा  सासून हास्पिटल में पैदा हुआ है . हालांकि लड़की की इच्छा थी कि वो अपने बच्चे को साथ रखे, लेकिन उसके मातापिता ने नवजात शिशु को एक एनजीओ को सौंप दिया कि वे किसी ज़रुरतमंद को गोद दे दें. मां पिता के इस फैसले के ख़िलाफ लड़की ने तीन दिन से खाना पीना छोड़ रखा था, लेकिन आखिर में वो मान गई.




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लड़की के माता पिता वैसे बलात्कार के आरोपी के साथ उसे भेजने को तैयार हो गए थे और उसे कोर्ट में हाज़िर होना था लेकिन आरोपी जब कोर्ट में पेश नहीं हुआ तो उन्होंनें बच्चे को एनजीओ को ही सौंपने का फैसला किया. लड़की की मां का कहना है कि आरोपी ने मेरी बेटी की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है. हम  बच्चे को ईश्वर का वरदान मान कर रखना चाहते थे लेकिन इस सोसायटी में अकेले मां के पास बच्चे को पालना बहुत मुश्किल भरा काम है. अब हमें अपनी बेटी के भविष्य की चिंता है कि उसका आगे क्या होगा. हम पढ़ा लिखा कर उसे अपने पैरों पर खड़ा करना चाहते हैं .




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लड़की के पिता ने बलात्कार की शिकायत 23 अप्रैल 2017 को दत्तावाड़ी पुलिस स्टेशन पर कराई थी. शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन बाद में वो जमानत पर छूट गया. इस बीच लड़की को प्रेग्नेंट हो गई.

ऐसा ही एक मामला पिछले दिनों चंडजीगढ़ में सामने आया था जब एक रेप विक्टिम लड़की के 26 सप्ताह के गर्भ को गिराने की इजाजत अदालत ने नहीं दी. फिर लड़की की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में भी समाजसेवी संगठनों ने याचिका दायर की लेकिन डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर लड़की की जिंदगी को खतरा देखते हुए कोर्ट ने एबार्शन की इजाजत नहीं दी .




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