अब क्या बदलेगा PRESIDENT HOUSE के KITCHEN में?

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President House Kitchen
President House Kitchen

प्रतिभा ज्योति:

भारत के 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 25 जुलाई को शपथ लेंगें. नए राष्ट्रपति के आने के साथ President House में जो सबसे बड़ा बदलाव अक्सर होता है वो है Kitchen में. नए राष्ट्रपति की पसंद और नापसंदगी के आधार पर सबसे पहले किचन में बदलाव किया जाता है ,क्या राष्ट्रपति सिर्फ़ शाकाहारी भोजन पसंद करते हैं या फिर मांसाहारी या भारत की किसी खास तरह की भोजन शैली .इस सब के आधार पर तय होती है राष्ट्रपति भवन का किचन. राष्ट्रपति भवन में दो किचन हैं एक समारोहों के लिए और दूसरी राष्ट्रपति व उऩके परिवार के लिए निजी किचन.

माना जा रहा है कि नए राष्ट्रपति कोविंद सादा भोजन पसंद करते हैं. लेकिन इससे पहले निवर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को Fish Curry बहुत पसंद थी तो उससे पहले देश की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को मराठी स्टाइल का भोजन पसंद रहा था.




प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति बनने के बाद यहां की किचन में कई बड़े बदलाव किए गए. भोज और समारोहों की तैयारी करने वाला किचन कहीं ज्यादा बड़ा और वेरायटी वाला हो गया. इसमें  कांटिनेटल, मुगलिया, इंडियन और बेकरी जैसे इसके छह अलग डिपार्टमेंट हो गए. यहां अब करीब 50 लोगों का स्टाफ रोज होने वाले किसी समारोह की तैयारी में लगे रहते हैं. राष्ट्रपति की निजी किचन में वो पकाया जाता है, जो उन्हें पसंद है या फिर उनके व्यक्तिगत मेहमानों को परोसा जाता है. मुखर्जी मंगलवार को छोड़कर रोजाना फिश करी, बंगाली मिठाइयां और सेब को अपने रोजाना अपने खाने में जरूर शामिल करते हैं.

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इससे उलट एपीजे अब्दुल कलाम थे. उन्होंनें यहां आते ही राष्ट्रपति की व्यक्तिगत किचन को बंद करा दिया. उनका मानना था कि अकेले एक व्यक्ति के लिए एक अलग किचन और स्टाफ की व्यवस्था करने की कोई ज़रुरत नहीं है. कलाम राष्ट्रपति भवन की स्टाफ कैंटीन से खाना बनवाकर खाते रहे. वह शाकाहारी थे. नियमित तौर पर इडली, बड़ा और सांभर नाश्ते के रूप में लेते थे.




भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद पालथी लगाकर भोजन करते थे. वह इस कदर शाकाहारी थे कि राष्ट्रपति भवन की रसोई में मांसाहार पर पाबंदी लगा दी गई थी. 1952 में जब राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति बने तब उन्होंने कोशिश की कि वायसराय हाउस के नाम से मशहूर भवन की अंग्रेजियत खत्म कर दें. उनके आने पर किचन को खूब धोया गया, शुद्धिकरण हुआ. फिर इसमें शाकाहार बनना शुरू हुआ. वह चौकी पर पालथी लगाकर भोजन करते थे.
दूसरे राष्ट्रपति एस राधाकृष्णन भी शाकाहारी थे. उनके राष्ट्रपति रहने तक विदेशी राष्ट्राध्यक्ष जब मेहमान बनकर यहां आते थे तो राष्ट्रपति भवन में ही रुकते थे, लेकिन धीरे-धीरे विदेशी राष्ट्र प्रमुखों ने पांच सितारा होटलों में रुकना पसंद करने लगे. इसके पीछे वजह बताई गई कि उन्हें वो भोजन पसंद नहीं आता था, जो यहां परोसा जाता था.

जाकिर हुसैन खाने के शौकीन थे .वे बड़ी पार्टियां देने के लिए जाने जाते थे.जब वह राष्ट्रपति भवन गए तो वहां किचन में मांसाहार भी शुरु हो गया उनके जमाने में राष्ट्रपति भवन के दरवाजे हमेशा खानपान और तंदूर विशेषज्ञों के लिए खुले होते थे. राष्ट्रपति बनने से पहले आमतौर पर उनकी पार्टियों की व्यवस्था उनकी बीवी शाहजहां बेगम करती थीं. अक्सर वह खुद लज्जतदार भोजन तैयार करती थीं और पार्टियों में उनके हाथ का बना खाना लोग खाते थे.




शंकरदयाल शर्मा, आर वेंकटरमन, के आर नारायण भी शाकाहारी थे. उनके रहने पर राष्ट्रपति भवन में फिर शाकाहार लौट आया. शंकर दयाल जब  इंग्लैंड में पढ़ रहे थे तो जितने साल वहां रहे, केवल उबले आलू खाते रहे.

ज्ञानी जैल सिंह के राष्ट्रपति बनने के दौरान पहली बार इस भवन के किचन को आधुनिक रूप दिया गया. उसे पूरी तरह से पांच सितारा होटलों की किचन में बदला गया. आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल शुरू हुआ. शेफ रखे गए. पहली बार राष्ट्रपति भवन के दो किचन बना दिए गए. एक किचन, जो लगातार यहां होने वाली पार्टियों और भोज की तैयारी करे और राष्ट्रपति का व्यक्तिगत किचन अलग कर दिया गया.

अब राष्ट्रपति भवन की किचन के स्टाफ में लगे लोग नए मेहमान और उनके परिवार की पसंद की तैयारी में जुट जाएगा.

 

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