छठ के बहाने SINDOOR पर निशाना तो बस अस्मिताओं का संघर्ष है..

59
Sindoor

गीताश्री:

वरिष्ठ पत्रकार और लेखिका:

कुछ नहीं, अस्मिताओं का संघर्ष है. Sindoor एक बहाना है, छठ एक मौक़ा है. छठ कोई पहली बार तो नहीं, Sindoor कोई पहली बार तो नहीं. हाल ही में करवा चौथ और तीज व्रत बीता है. Sindoor क्यों , मुझे तो मेंहदी निकम्मेपन की निशानी लगती है.

साड़ी , मुझे शामियाना, दरी, ज़ाजिम से भी बदतर. पहनते हैं कि नहीं ? मेंहदी लगाते हैं कि नहीं? मेंहदी के कलाकार सबसे ज़्यादा पुरुष हैं. उनसे सुंदर मेंहदी महिलाएं नहीं रच सकतीं. यक़ीन न हो तो बाज़ारों में चक्कर लगा आइए. सारे युवा लड़के स्टूल पर बैठे, मेंहदी की डिज़ाइन सजाए मिल जाएंगे.

गीताश्री , वरिष्ठ पत्रकार और लेखिका

बहुत कमाई होती है. मेंहदी वालों का ज़बरदस्त कारोबार है. कमाई का ज़रिया है. अब ये न कहिएगा कि बाज़ार की देन है. मेंहदी तो प्रकृति के दिए पत्तों के रंग हैं. कृत्रिम तो नहीं. 

शोर तो लिपिस्टक पर मचना चाहिए. ख़ून से लाल होंठ देख कर मुझे हॉरर फ़िल्म की याद आती है. युवावस्था में हरी पोशाक और लाल लिपिस्टिक लगा कर हम दो सहेलियों ने फ़ोटो क्या खींचा लिया, घर में भाईयों ने मज़ाक़ बना दिया. 
जो ख़ून पीता हो….ख़ूनी !! यही नाम पड़ गया हमारा. 

फिर जीवन भर लाली से दूर रहे. लगाते हैं… मगर हल्का.  ख़ैर… 

MUST READ: मैत्रेयी पुष्पा ने छठ पर सिंदूर पर लगाने की परंपरा पर QUESTION उठाया तो हो गईं ट्रोल

तो क़िस्सा कोताह ये कि अस्मिताओं के संघर्ष काल में कोई एक अस्मिता ऐसे सिर उठाए. पूरा परिदृश्य, माहौल छेक ले, भला कैसे गंवारा होगा. कोई कमी ढूंढी जाए कि उनका मनोबल तोड़ा जा सके. उनके भीतर दबी हुई भावुकता को कुचल दिया जाए. वे पिछडे थे, पिछड़े ही रहें. अचानक कैसे नक़्शे पर छा सकते हैं? होली, दीवाली की तरह कैसे छा सकता है इनका लोकपर्व ? 

इधर , पिछले कुछ वर्षों में विस्थापित बिहारियों के भीतर अपने रिवाजों और ज़मीन के प्रति मोह जाग गया है. ठीक वैसे ही जैसे विदेश में बसे भारतीयों का जगता रहता है. वहां भी अस्मिता का ही संघर्ष है सारा. अपनी और अपनी भारतीयता का भी. 

मामला ये कि इस कमज़ोरी पर चोट करो, वो भी अचूक हथियारों से. और उनके ही लोगों से करवाओ. रणनीति सफल हुई. प्रगतिशीलता और फेमिनिज्म का सतही अर्थ समझने वाले दो दिन से हथौड़े मारे जा रहे हैं. भाईयों एवं बहनों….
अपनी हथेलियां चेक करना. ख़ून निकल रहा है या पसीना ? दोनों आपके पुरखो का क़र्ज़ है.

(साभार-फेसबुक वॉल)

महिलाओं से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करेंट्विटर पर फॉलो करे… Video देखने के लिए हमारे you tube channel को  subscribe करें

 
 
 
Facebook Comments