RAPE VICTIM की चुप्पी का मतलब SEXUAL RELATION बनाने के लिए सहमति देना नहीं

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Rape Victim

किसी Rape Victim  की चुप्पी का मतलब यह नहीं है कि किसी को उसके साथ Sexual Relation बनाने की सहमति देने का प्रमाण पत्र मिल गया हो. दिल्ली हाईकोर्ट ने रेप के जुर्म में एक युवक को निचली अदालत से मिली 10 साल की कैद की सजा को बहाल रखते हुए यह टिप्पणी की है. हाईकोर्ट ने कहा कि चुप्पी को यौन संबंध बाने की सहमति का प्रमाण नहीं माना जा सकता. 




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जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल ने रेप के दोषी के बचाव की इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया कि घटना के बारे में Rape Victim  की चुप्पी उससे Sexual Relation  बनाने के लिए उसकी सहमति का सबूत है. हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी के बचाव की इस दलील का कोई आधार नहीं है. इसलिए सहमति के बिना शारीरिक संबंध बनाना रेप ही माना जाएगा.

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने निचली अदालत के 2015 के फैसले को बरकरार रखते हुए आरोपी की अपील को खारिज कर दिया. निचली अदालत ने दोषी को 10 साल की सजा सुनाई थी. जिसके खिलाफ उसने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की थी.




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यह मामला दिसंबर 2010 का है. पुलिस के मुताबिक पीड़िता उत्तर प्रदेश से दिल्ली काम की तलाश में आई थी. काम के तलाश के दौरान ही यहीं उसकी मुलाकात मुन्ना और सुमन कुमार नामक के दो युवकों से हुई. पुलिस के मुताबिक मुन्ना ने पीडि़त महिला से पहले जान-पहचान किया. फिर काम दिलाने का झांसा दिया और महिला को अपने भरोसे में लिया. 




महिला ने उस पर भरोसा किया. उसने आरोप लगाया था कि मुन्ना उसे पानीपत ले गया जहां उसे करीब दो महीने तक उसे एक फ्लैट में बंद रखा और इस दौरान कई बार रेप किया. मुन्ना ने हाईकोर्ट में यह दलील दी कि उसने जो कुछ भी किया वह पीड़ित महिला की पूरी सहमति से किया था इसलिए इसे रेप नहीं माना जाए.  

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