क्यों खत्म हो गया 6 महीने का पीरियड, सहमति से DIVORCE लेना अब आसान

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Divorce
Supreme Court waives 6 months wait for divorce

ट्रिपल तलाक के मामले में ऐतिहासिक फैसले के बाद Supreme Court ने एक बार फिर से Divorce के मामले में एक अहम फैसला दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने आपसी रजामंदी से तलाक लेने वालों के लिए 6 महीने की बाध्यता (कूलिंग पीरियड) को खत्म कर दिया है. फैसले के अनुसार यदि दोनों पक्ष की रजामंदी से तलाक की अर्जी दी गई है तो इस मामले में ट्रायल कोर्ट के ओर से दी जाने वाली कूलिंग पीरियड की कोई जरुरत नहीं है.




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कोर्ट ने यह फैसला दिल्ली के एक कपल की याचिका पर दिया है. कपल ने मांग की थी वे 8 सालों से एक दूसरे से अलग रह रहे हैं इसलिए 6 महीने की बाध्यता को खत्म किया जाए. इस याचिका पर फैसले में कोर्ट ने कहा है कि हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13 बी (2) में जो 6 महीने का पीरियड दिया गया है वह केवल एक निर्देश है, यह आवश्यक नहीं है. हर केस की स्थिति को देखकर कोर्ट यह तय करे कि क्या दोनों पक्षों के बीच सुलह की संभावना बिल्कुल खत्म हो गई है? यदि ऐसा होता है कि इस अवधि को खत्म कर तलाक दे सकता है. 




कोर्ट ने कहा कि यदि दोनों पक्षों ने अपने सभी विवाद निबटा लिए हों जैसे कि बच्चों की कस्टडी किसके पास होगी, एक साथ कोई लोन लिया हो तो उसे कैसे चुकता किया जाए आदि. ऐसे में इस मामले को 6 महीने तक लटकाने से उनके लिए परेशानी ही पैदा होगी. 




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कोर्ट ने कहा कि 6 महीने का कूलिंग पीरियड यह सोचकर दिया गया है कि यदि कपल में सुलह की कोई संभावना हो तो उसे अनदेखा नहीं किया जाए. कई बार ऐसा होता है कि गुस्से में आकर अचानक कोई फैसला ले लिया गया है लेकिन बाद में उस पर पर गहनता से विचार करने पर शादी बच जाती है. लेकिन रजामंदी से तलाक लेने की स्थिति में ये टाइम पीरियड कोर्ट और पीड़ित दोनों के लिए समस्या बन रही है. जब कपल में सुलह की कोई संभावना ही नहीं बची तो 6 महीने की बाध्यता क्यों रखी जाए?

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