नारीवादी विचारधारा का सौंदर्य से भला CONFLICT कैसे हो सकता है?

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Conflict

प्रियंका ओम:

लेखिका और कॉलमनिस्ट:

नारीवादी विचारधारा का सौंदर्य से Conflict ? अपने आप में कितना विरोधाभास लिये हुए है ये कथन.  ज़रा देखें तो नारी को सौंदर्य से अलग करने का षड्यंत्र कितना मोहक है कि हम अपनी क़लम उठाने को विवश ही हो गए. अब यह एक नया शिग़ूफ़ा छिड़ा है कि नारीवाद विचारधारा वाली स्त्रियों को Beauty से विमुख होना चाहिए. स्वयं नारी का नारीवाद से अलगाव कैसे हो ?




एक तो नारीवाद के बारे में पहले से अनेक भ्रांतियां है, मसलन नारीवाद मतलब पुरूष जैसा होने की मांग तो फिर BHU के डंडे पर रुदन क्यूों ? तो क्यों नही लड़कियां भी लड़कों के सामने Masturbation करती है या लड़कों की तरह सार्वजनिक स्थलों पर मूत्र बिसर्जन करती है? 




नारीवाद को Beauty से अलग करने का अर्थ है नारी को नारीवाद से अलग करना क्योंकि नारी और सौंदर्य तो एक दूसरे के पूरक हैं. सौंदर्य से नारी को अलग करने की सोच ठीक वैसी ही है जैसे बादल से बूंदों को अलग करना. जबकि सामान्य से सामान्य मनुष्य को भी ख़ूबसूरत दिखने अथवा साज शृंगार का अधिकार है तो भला नारी का सौंदर्य से दूराव क्यों? 




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बताइये कैसे करेंगे आप नारीवादी विचारधारा को सौंदर्य से अलग? कहीं आपका यह कहना नारीवाद से नारी को ही तो अलग कर देने की जुगत तो नही? अगर ऐसा है तो फिर आपके पास ‘वाद’ के सिवाय बचेगा भी क्या और ‘वाद’ लेकर आप करेंगे भी क्या? अव्वल तो पहले से ही वाद की कोई कमी नही आपके पास !

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प्रियंका ओम ,लेखिका और कॉलमनिस्ट

बिना सौंदर्यबोध के नारी की कल्पना एक निहायत ही कमजर्फ़ सा ख़याल है और नारीवाद किसी अलग ग्रह से तो नही आया ? जब नारी ने अपने हक़ की मांग की तो नारीवाद हो गई और अब इंतहा तो देखिये नारीवाद से सौंदर्य को अलग करने का आपका फ़िज़ूल सा ख़याल ठीक वैसा ही है जैसे धूप से ग़र्मी को अलग करने का ख़याल क्योंकि सौंदर्य तो नारी ही है यदि ऐसा नही होता तो सौंदर्य रस में डूबी कवियों की कालजयी रचना नारी स्तुति नही होती.

नारीवाद को सौंदर्य से अलग करने के ख्याल जहनी फ़ितूर ही हो सकता है क्योंकि साज शृंगार नारी का अधिकार है और नारीवाद का आविर्भाव अपने अधिकार की लड़ाई को लेकर शुरू हुई थी तो फिर सीधे शब्दों में कहिये आपको नारीवाद से एतराज़ है जनाब.

 

नारीवाद ने एक अलग तरह से सौंदर्यभूती को जन्म दिया है जिसे आप आत्मविश्वास के नाम से पुकार सकते है इस आत्मविश्वास से अपनी बात सामने रखने की हिम्मत आती है. अपने हक़ के लिये लड़ने की कुवत आती है इसी कुवत ने इसी हिम्मत ने देशभर में विशिष्ट रूप सज्जा और आवरण से अपनी पहचान बनाई है.

 माथे पर बड़ी सी लाल बिंदी धारण कर दुर्गा रूप में प्रकट होने वाली नारीवाद स्त्रियां दुर्गा समान ही शक्तिशाली होती है तो ऐसा कहिए आप शक्ति से डर गए. आप डर गए स्त्रीवाद के हुंकार से फिर आपने इन्हें कमज़ोर करने की नई जुगत लगाई,आत्मविश्वास से अलग करने की जुगत. जाइये कि अब आपकी छलबुद्धी नही चलेगी कि आत्मविश्वास का छोटा सा पौधा विशाल वटवृक्ष बन चुका है जिसकी छाया में कई उन्माद पल रहे हैं ये उन्माद आपकी पृतिसत्ता को जड़ से उखाड़ फेकेंगी.
 

सौंदर्य बोध का कोई मानक नही है. गांव की स्त्रियां पैरों में महवार लगाकर और होंठों पर सिंदूर रगड़ कर ख़ूबसूरत दिखती है तो हाई सोसायटी कि महिलाएं फ़्रेंच आर्ट और naked लिप्स्टिक लगाकर आंतरिक ख़ूबसूरती की बात करती है. मूल बात ख़ूबसूरत लगना है क्योंकि स्वसौंदर्य की अनुभूति किसी को भी आत्मविश्वास से भर देता है कहीं भी किसी भी क्षेत्र में आत्मविश्वास ही सफलता की मानक मानी जाती है.

 

नारीवाद विचारधारा तुम किसी के कहने में नही आना सौंदर्यबोध से दूर मत होना तुम्हारी विजय निश्चित है..

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