मेरे लिए नहीं सजने-संवरने का मतलब है FEEL GOOD करना

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निवेदिता शकील
Nivedita Shakeel

निवेदिता शकील:

(Senior Journalist)

मेरे साज श्रृंगार नहीं करने का मतलब है Feel Good होना. मेरी आंखों में हमेशा होता है ढेर सारा काजल और बड़ी सी बिंदी. इसके अलावा चेहरे पर कुछ लगाया नहीं. शादी ब्याह में लाल रंग की लिपस्टिक. मुझे लाल रंग कुछ ज्यादा ही पसंद है. शायद इसलिए कि ये क्रांति और मुहब्बत का रंग है. काजल तो बचपन से लगाते हैं. मां हम बहनों के लिए जतन से काजल बनाती थी. शादी के बाद तक मां के हाथों से बना काजल ही लगाती रही.




अब मां नहीं बना पाती है. मेहनत है उसमें. रात भर मां दिया जलाकर रखती थी. बीच- बीच में जाकर देखती रहती थी कि दिया बुझा तो नहीं. मां का बना काजल विदेश की यात्रा कर चुका है. जब मेरी बहन सोनल अमेरीका में रहती थी तो वहां भी जाता था. जिन किताबों को पढ़कर बड़ी हुयी उसमें स्त्रीवादी विचारों का मेरे ऊपर काफी प्रभाव पड़ा. उनको पढ़ते हुए श्रृंगार से विरक्ति हो गयी. मुझे याद है शादी के बाद जब पहली बार हमने लाल रंग से अपने होठों को रंगा तो मेरे सारे क्रांतिकारी दोस्त भड़क गए. सिंदूर, चूड़ी और गहने तो दूर की बात है. मेरे लिए सजने सबरने का मतलब है खुद को अच्छा लगना. सुहाग की निशानी कतई नहीं.




जब स्कूल में थी तब भी सिर्फ काजल लगाती थी. परिवार में सजने सवरने का न तो रिवाज था न पैसे थे. अभाव की वजह से घर में क्रीम भी नहीं आता था. गर्मियों और सर्दी के दिन होंठ खुश्क हो जाते थे. मेरी सारी दोस्त क्रीम लगाती थी. सब की त्वचा मुलायम रहती थी. मैंने अभाव से एक नया तरीका इजाद किया. मैं सरसों का तेल होठों पर लगाती थी जो खूब चमकता था. फिर क्या था लड़कियां मेरे पीछे पड गयी तुम क्या लगाती हो. उन्हें क्या पता ग़रीबी ने फैशन के नए रास्ते तलाश लिए. उन्होंने मेरा बैग तलाशा जिसमें उन्हें एक शीशी में सरसों का तेल मिला. फिर क्या था मेरी ग़रीबी फैशन में आगे निकल गयी.




उन्ही दिनों रेखा की फिल्म खूबसूरत आई थी जिसमें उसके होंठ चमकते रहते थे. बाद में दोस्त मजाक करते थे की रेखा को तुमने ही ये नुस्खा बताया है क्या?  जिन्दगी में कभी खूब मेकअप करने का मौका नहीं मिला. न कभी वैसा मन किया. एक बार अपनी बहन की बेटी की शादी में गयी. भब्य आयोजन था. मेकअप के लिए पार्लर से लड़कियां बुलाई गयी थी. सबने कहा कि तुमने कभी मेकअप नहीं किया है आज करवा ही लो. मेरा मन भी डोल गया. काफी मेहनत के बात मुझे तैयार किया गया. जब मैंने आईने में अपनी शक्ल देखी तो डर गयी. एकदम चुड़ैल लग रही थी, फिर मैंने सारा मेकअप उतरा और अपने रूप में आयी.

हम इस बात में यकीं करते हैं कि आपके दिल को जो अच्छा लगे करें. तो आज मेकअप के बिना ये तस्वीर आप सब के लिए वैसे अक्सर बिना मेकअप के ही रहती हूं पर काजल नहीं छूटता . आज उसके बिना ही कजरारे नैन.

(निवेदिता शकील ‘Natural Selfie Campaign’ में शरीक हुई हैं) 

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