महिलाओं के कंधों पर ही क्यों है HOUSE WORK की ज्यादातर जिम्मेदारियां?

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House Work
Courtesy: google.com

संयोगिता कंठ:

मौजूदा आधुनिक युग में अब महिलाओं को भी अपना करियर चुनने और अपना अलग व्यक्तित्व बनाने की स्वतंत्रता मिल रही है. वे करियर और रोजगार के हर उस क्षेत्र में अपनी दखल दे चुकी हैं जो पहले पुरुष के वर्चस्व वाले माने जाते थे.   लेकिन घर और बाहर दोहरी जिम्मेदारियां संभालने वाली अधिकांश महिलाओं को परिवार से सहयोग नहीं मिलता. यही वजह है कि House Work की ज्यादतर जिम्मेदारियां महिलाओं के कंधों पर ही होती है.




दुनिया भर में यही स्थिति है. महिलाएं चाहे कितनी भी अच्छी नौकरी कर रही हों, उनकी सैलरी चाहे कितनी भी ज्यादा क्यों न हो आज भी अपने लाइफ पार्टनर के मुकाबले House Work पर का ज्यादा बोझ उनके कंधों पर ही होता है. माना जाता है कि घरेलू जिम्मेदारियां महिलाओं को ही पूरी करनी चाहिए.




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कनाडा की 900 से ज्यादा महिलाओं पर 25 से 43 साल की उम्र के बीच किए एक स्टडी में भी यही निष्कर्ष सामने आया है. स्टडी में कहा गया है कि उम्र का चाहे कोई भी दौर हो घर का सबसे ज्यादा काम औरतों को ही करना पड़ता है. 




भारत में भी यही स्थिति है. पारंपरिक तौर पर महिलाओं पर ही घर के काम का पूरा जिम्मा होता है. खाना बनाने, कपड़े धोने, घर की साफ-सफाई का बच्चों का ध्यान रखने, उनका होमवर्क कराने, घर के बड़े-बुजर्गों का ध्यान रखने उन्हें ही करना होता है.

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वैसी महिलाएं जो नौकरी नहीं करतीं उनके लिए घर के काम समय बिताने का यह एक विकल्प हो सकता है लेकिन वे महिलाएं जो वर्किंग है और शाम को घर लौटती हैं उन्हें भी यह दोहरी जिम्मेदारी उठानी पड़ती है. उन्हें ऑफिस और घर को संभालने में ज्यादा शारीरिक और मानसिक मेहनत करनी पड़ती है.

इससे एक तरफ जहां उनकी सेहत को नुकसान पहुंचता है वहीं उनमें यह भाव भी आ सकता है कि परिवार में उनकी उपेक्षा की जा रही है. यही वजह है कि कई महिलाएं मां बनने के बाद नौकरी छोड़ने पर मजबूर हो जाती हैं.

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