#MeToo कैंपेन चलाने वाली महिलाओं को टाइम मैगजीन ने चुना ‘PERSON OF THE YEAR’

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#Me-too-Person Of The Year
#Me-Too-Person Of The Year

यौन उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने के लिए #MeToo हैशटैग से कैंपेन चलाने वाली महिलाओं को टाइम मैगजीन ने ‘Person Of The Year’ चुना है. टाइम मैगजीन ने उन्हें इन्हें ‘The Silence Breakers’ यानी चुप्पी तोड़ने वालीा बताया है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस सूची में दूसरे स्थान पर रहे. उनके बाद चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग का नाम है.




महिला हिंसा और शोषण के खिलाफ आवाज उठाते हुए दुनिया भर की महिलाओं ने #MeToo कैंपेन शुरु किया था. देखते-देखते यह कैंपेन दुनिया भर में मशहूर हुआ और करीब 3 करोड़ महिलाएं इस कैंपेन से जुड़ी.

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2006 में सबसे पहले MeToo शब्द का इस्तेमाल सामाजिक कार्यकर्ता टाराना बुर्के ने महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने के लिए की थी. बुर्के ने दुनियाभर की महिलाओं से अपील की थी वे इस शब्द के साथ अपने कटु अनुभव को शेयर करें.




11 साल बाद यह शब्द फिर चर्चा में जब आया हॉलीवुड अभिनेत्री एलीसा मिलानो ने खुलासा किया कि हॉलीवुड के मशहूर निर्माता निर्देशक हार्वी वाइन्सटाइन ने उनके साथ-साथ कई अभिनेत्रियों का यौन उत्पीड़न किया. उसके बाद #MeToo हैशटैग से हॉलीवुड की कई मशहूर अभिनेत्रियों ने हार्वी वाइन्सटाइन पर यौन उत्पीड़न के कई आरोप लगाए.




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टाइम के एक सर्वे में 82 फीसदी महिलाओं ने माना था कि इस कैंपेन की वजह से उन्हें यौन शोषण के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत मिली है. यह कैंपेन भारत में भी बहुत पॉपुलर हुआ और सोशल मीडिया पर कई महिलाओं ने अपने साथ हुए यौन शोषण की बात कही.

#MeToo कैंपेन संपादकों की राय में शामिल होने के कारण वोटिंग में सबसे आगे रहा. इस कैंपेन के साथ ही 15वीं बार किसी ग्रूप या कैंपेन को टाइम Person Of The Year चुना गया है. वैसे अक्सर हर बार किसी व्यक्ति विशेष को टाइम पर्सन चुना गया है.

 

 

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