#MeriRaatMeriSadak सिर्फ YOUNG GIRLS की आवाज नहीं थी?

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Young Girls

गीताश्री:

#MeriRaatMeriSadak . इसे आप हल्के से न लें. यह प्रतिरोध सिर्फ Young Girls की ओर से नहीं था. उसमें हम सब शामिल हैं, जो अपनी बेटियों के लिए सुरक्षा चाहते हैं. यह असुरक्षा के खिलाफ प्रतिरोध है. कृपया कोई और इल्ज़ाम न लगाएं कि लड़कियां, देर रात बार, पब में जाने की आज़ादी चाहती हैं. मौज मस्ती करना चाहती हैं. यौनिकता का उत्सव मनाना चाहती हैं. अपने दिमाग़ से कचरा जल्दी निकालें, नहीं तो उसके दुर्गन्ध से आपका ही माथा फट जाएगा एक दिन. 
बूझे ?? 




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हम क्यों शाम होते खौफ से घिर जाएं?. क्यों घरों में दुबक जाएं कि रात में जंगल के राजा छुट्टा घूमने आ रहे, लड़कियों घर में बंद रहो. बाहर न निकलो. किसी ने सुझाव दिया है न कि रात को लड़कों को घर से मत निकलने दो, लड़कियां सेफ रहेंगी. इस दिशा में सोचिए कि देर रीत सड़कों पर किसे निकलना चाहिए या किसे नहीं निकलना चाहिए? 
इस प्रतिरोध में हरेक उम्र की स्त्रियां शामिल हैं. आगामी ख़तरे का अहसास है हमें. दिन ब दिन हालात बदतर होते जा रहे, इसको हम भांप चुके हैं. 




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जब हम युवा हो रहे थे तब बहुत रोक टोक और पाबंदियां थीं. तब हालात इतने बुरे नहीं थे. लड़कियां देर रात बाहर कम निकलती थीं. उतनी कामकाजी भी नहीं थीं. गांव क़स्बों में तो वैसे भी देर रात लडकी बाहर जा नहीं सकती थी. कभी जाना हुआ तो मरियल टाइप भाई- भतीजा टाइप पहरेदार साथ में अटैच हो जाता. जो जरुरत पड़ने पर शायद ही बचाव कर पाए. तब जरुरत उतनी पड़ती नहीं थी. लड़के दिन में ही सिनेमा हॉल या कॉलेज गेट पर टकराते और फब्तियां कसते सुने गए. कई बार वे पिट पिटा गए. उन लड़कों में कोई किसी लडकी का भाई निकल आता था. सिनेमा हॉल परिसर तब युद्ध छावनी में बदल जाता. हम लोग जल्दी से रिक्शा पकड़ कर निकल भागते. पीछे सड़क छाप मजनुओं की धुलाई होती रहती. इसको बोलते थे– “फैटा फैटी होना.”




समय बदला. लड़कियां बाहर निकलने लगीं. नौकरीपेशा हुईं. समाज उदार हुआ. लड़कियां थोड़ी समझदारी पर आईं. कुछ माहौल हमारी पीढी ने बदला. बाक़ी तस्वीर आज की युवा लड़कियों ने बदल दी. जिन्होंने चुनौतीपूर्ण काम को अंजाम देकर ख़ुद को लड़कों के बराबर साबित कर दिया. कई मामले में वे आगे निकलती दिखाई दीं. 
फिर किस बात की पाबंदी ! क्यों न निकले देर रात घर से बाहर ! 
मेरी रात ! मेरी सड़क !! 
यह चुनौती है, याचना नहीं. यह हुंकार है, आह नहीं.

(साभार-फेसबुक वॉल)

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