‘मेरी रात-मेरी सड़क’ का नारा देकर NIGHT में क्यों निकलीं महिलाएं ROAD पर?

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#MeriRaatMeriSadak
Meri Raat Meri Sadak Campaign

revolutionमेरी रात-मेरी सड़क का नारा देती हुए देश भर की महिलाएं शनिवार की रात सड़कों पर निकलीं-मकसद था महिलाओं के लिए रात में भी सड़कों को सुरक्षित बनाने का. सोशल मीडिया पर चलाए गए इस कैेंपेन को महिलाओं का खूब समर्थन मिला और दिल्ली, गाजियाबाद, जयपुर, बनारस में महिलाएं निकली सोच की उस बेड़ी को तोड़ने के लिए रात में  घर से निकली कि यह सड़क जितनी पुरुषों की है उतनी महिलाओं की भी. शांतिपूर्ण तरीके से हुए मार्च में महिलाओं ने यह संदेश दिया कि यदि अधिक से अधिक संख्या में महिलाएं रात में निकलें तो वे समाज की कई धारणाओं को तोड़ सकती हैं. 




रात में यदि महिलाओं के साथ कुछ अपराध होता है तो उसका दोष उनके सिर ही मढ़ दिया जाता है. कहा जाता है क्या जरुरत थी रात में बाहर जाने की. समाज उन लोगों से नहीं पूछता कि आप को यह किसने अधिकार दिया कि यदि कोई महिला रात में बाहर जाए तो आप लपलपाते हुए उसे अपना शिकार बनाएं. वरिष्ठ लेखिका और पत्रकार गीताश्री कहती हैं कि समाज और सिस्टम दोनों को महिलाओं के लिए रात में भी सड़कों को बेखौफ बनाना होगा. आखिर हम क्यों न निकलें रात में, क्या अपने जरुरी काम छोड़ दें? हमें रोकने वाले इस व्यवस्था को ठीक क्यों नहीं करते? उनका कहना है कि महिलाओं को भी इस रोक-टोक के जंजीर को तोड़ना होगा. 




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महिलाओं के मुद्दों को लेकर यूट्यूब पर कार्यक्रम चलाने वाली शालिनी श्रीनेत भी मानती हैं कि रात में भी सड़कें महिलाओं के  लिए भयमुक्त बन सकें इसके लिए हमें भी आगे होना होगा. जब महिलाओं के सुरक्षा की बात आती है तो हम आलोचनाएं करते हैं. शिकायत करते हैं लेकिन जब खुद पहल करने की बात आती है तो हम पीछे हट जाते हैं. 




मालूम था कि केवल रात निकलने भर से कोई बदलाव नहीं होगा, आलोचनाएं होंगी, लोग तंज कसेंगे,  लेकिन एक छोटा सा प्रयास था यह टटोलने का कि क्या संभव नहीं है कि सिस्टम, सरकार और समाज मिलकर वाकई हर रात महिलाओं के लिए सुरक्षित बना दें? क्या वास्तव में यह असंभव काम है कि महिलाएं बेखौफ घर, ऑफिस का काम निबटाकर या किसी और जरुरी काम को पूरा करके बेखौफ रात में भी सुरक्षित घर लौट सके.  

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