‘मन की बात’ ने कैसे बना दिया 9th को PREGNANT WOMEN और DOCTORS के लिए अहम

556
Pradhan Mantri Surakshit Matritav Abhiyan
Pradhan Mantri Surakshit Matritav Abhiyan

राजस्थान के सीकर जिले के Banjara Community की लच्छा देवी और उनके पति पारस अपनी एक महीने की बेटी के साथ बहुत खुश हैं. लच्छा देवी जब गर्भवती हुईं तो पारस हर महीने उन्हें एक अभियान से जोड़ दिया. यह अभियान था हर महीने की 9 तारीख को Pregnant Women को  Pradhan Mantri Surakshit Matritav Abhiyan (PMSMA) के तहत  Delivery से पहले की देखभाल के लिए स्वास्थय केंद्र लेकर जाने का. अपनी बेटी को लेकर Health Centre जाने वाले पारस अपनी कम्युनिटी के दूसरे लोगों को भी इस अभियान से जुड़ने की प्रेरणा दे रहे  हैं.




खासतौर पर ग्रामीण इलाकों के लिए Safe Motherhood  को लेकर इस अभियान की शुरूआत पिछले साल हुई थी. प्रेग्नेंसी और डिलेवरी के दौरान मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहें इसके लिए मां की देखभाल नियमित रुप से फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ता रखते हैं.  वहीं डिलेवरी से पहले सरकारी स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों पर Gynecologist और  Physician महिलाओं की जांच करते हैं. एक पैकेज के तहत गर्भवती महिलाओं को आयरन फोलिक की गोलियां और कैलिशयम सप्लीमेंटस दिए जाते हैं.  साथ ही हीमोगलोबिन, एचआईबी और सिफइलिस की जांच भी की जाती है. यह पैकेज अभियान का हिस्सा है और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में यहां तक कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों में गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था की दूसरी व तीसरी तिमाही के दौरान मुहैया कराई जाती हैं.  




स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ें बताते हैं कि देशभर में इस अभियान के तहत अब तक 11,000 जन स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों में 45 लाख गर्भवती महिलाओं का Delivery से पहले ChecK-Up किए जा चुके हैं.  1 लाख 80 हजार से अधिक उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं का पता लग चुका है. एक स्टडी के मुताबिक़ भारत में हर साल 167 महिलाएं गर्भावस्था या जन्म संबंधी जटिलताओं के कारण मर जाती हैं.




ऐसी मौतों की एक बहुत बड़ी संख्या को रोका जा सकता है अगर समय पर देखभाल और पर्याप्त एहतियात बरती जाए. आंकड़ें बताते हैं कि बेशक मौतें कम हुई हैं मगर आज भी भारत में बड़ी संख्या में हर साल  महिलाएं के दौरान मर रही हैं और ऐसी महिलाओं को मरने से बचाया जा सकता है. इन मौतों को  दुनिया भर में डिलेवरी के दौरान जितनी मौतें होती है उसमें 17 फीसदी मौतें भारत में होती है. Sample Registration System Statistical Report 2012-2013 के अनुसार शिशु मृत्यु की बड़ी वजह समय से पहले डिलीवरी और लो बर्थ है, दोनों को मिलाकर यह आंकड़ा 35.9 फीसदी है और निमोनिया के कारण 16.9 फीसदी मौतें होती हैं.

किशोर व अनपढ़ मांए और ऐसी मांए, जो ऐसे इलाकों में रहती हैं, जहां पहुंचना मुश्किल है, बच्चे को जन्म देते वक्त उनके मरने के अवसर अभी भी बहुत ज्यादा हैं. निम्न आर्थिक वर्ग की मांओं की मृत्यु दर ढाई गुणा अधिक है. ऐसी महिलाओं के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान एक वरदान की तरह है. इस अभियान की विशेषता यह है कि यह स्वैच्छिक सहयोग से चलाया जा रहा है. देशभर में 3900 से ऊपर निजी डाक्टर गर्भवती महिलाओं को मुफ्त अपनी सेवाएं प्रदान कर चुके हैं। यह सब तब हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 जुलाई 2016 को ‘मन’ की बात कार्यक्रम में निजी डाक्टरों को साल में 12 दिन इस पहल के लिए समर्पित करने की अपील की थी. इसी अपील का असर हुआ कि डॉक्टर स्वेच्छा से इस अभियान में जुड़ रहे हैं.  

 

 

 

 

 

 

 

Facebook Comments