BREAST बीमार हो जाएं तो औरत बीवी नहीं रह जाती?

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Breast

रीवा सिंह:

हाल ही में ही मेरी नजर हिंदी अखबार के एक खबर पर पड़ी.  पंजाब के बटाला में एक आदमी ने अपनी पत्नी का क़त्ल कर दिया. खबर के मुताबिक इस दंपत्ति का विवाह 6 साल पहले हुआ था और इनका एक बेटा भी है. औरत का जुर्म ये था कि वो Breast Cancer की मरीज़ थी. इलाज के दौरान डॉक्टर ने उसका एक Breast ऑपरेट कर के निकाल दिया. ऑपरेशन के बाद पवित्र सिंह पति अपनी पत्नी कुलजीत कौर से उखड़ा-उखड़ा रहने लगा, वो अक्सर ही उसे पीटता था जिसकी शिकायत कुलजीत ने अपने भाई से की थी.

भाई की मानें तो उसने पवित्र सिंह को समझाने की कोशिश की थी ताकि वो ऐसा न करे. शादी के बाद औरतों के मायकेवालों की भूमिका काउंसलर से अधिक कम ही घरों में होती है. बेटी की शादी हो गयी, दामाद को लाइसेंस मिल गया उसके साथ कुछ भी करने का. यदि मार दिया तो समझा देंगे कि अब न मारे, मारपीट से कोई रिश्ता थोड़ी तोड़ता है. रिश्ता निभाकर चलना एक कला है. भले इस कला की प्रदर्शनी में एक ज़िंदा बेटी अजायबघर बनी रहे पर कोशिश यही रहती है कि रिश्ता निभता रहे.

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इसी साल थाइलैंड से भी कुछ ऐसी ही खबर मिली. ‘डेली मेल’ लिखता है कि 36 वर्षीय वीरामॉन और उसकी बेटी को छोड़कर उसका पति तब अचानक चला गया जब उसे पता चला कि उसकी पत्नी को ब्रेस्ट कैंसर है. देखरेख न करने से वीरामॉन का कैंसर बढ़ता गया और स्तन से लाल और बैगनी रंग की गांठें निकलने लगीं. पति को पता चल गया था कि अब उसके ब्रेस्ट नहीं रहेंगे इसलिए उसने पत्नी का इलाज कराने की ज़हमत भी नहीं उठायी और छोड़कर अलग हो गया.




गुड थेरैपी डॉट ओआरजी नामक साइट पर ऐसे सवाल पड़े हुए हैं जहां एक पति अपनी पत्नी को इसलिए छोड़ देना चाहता है क्योंकि उसका वज़न बहुत बढ़ गया है और अब वो आकर्षक नहीं लगती. पति को पत्नी की जरुरत तब तक है जब तक वह सेहतमंद है आकर्षक है?  यदि एक ब्रेस्ट बीमार हो गया और उसे काटकर अलग कर दिया गया तो क्या वह पत्नी अब पत्नी नहीं रह गई.  पति-पत्नी का रिश्ता बस एक जिस्म भर से लगाव का होता है?

हम ऐसे समाज में रहते हैं जहां स्त्री-पुरुष के लिए अलग-अलग मापदंड है. पुरुषों का वज़न या उनका रंग-रूप न के बराबर मायने रखता है. चूंकि वो पुरुष हैं इसलिए वो कैसे भी उन्हें पूरा सम्मान मिलता है पर औरतों को खूबसूरत ही होना चाहिए. शादी से पहले भी और शादी के बाद भी.

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हम अपने आस-पास भी देखते हैं कि यदि किसी कपल के कई सालों तक कोई बच्चा नहीं होता तो वंश चलाने की दलील देकर पति की दूसरी शादी करा दी जाती है. यदि पति ही बच्चा पैदा करने में समर्थ नहीं हो तो घर में चुप्पी हो जाती है, और लोग बच्चा गोद लेने से लेकर न जाने क्या-क्या उपाय बताने लगते हैं. मर्द अपनी कमजोरी दुनियावालों के सामने नहीं बताता है. ऐसे में क्या किसी महिला की दूसरी शादी हो सकती है? कभी पत्नी यह कह पाती है कि तुम सेक्स नहीं कर पा रहे या बच्चा नहीं दे पा रहे हो, मुझे दूसरी शादी करनी है? यदि उसने ऐसा कहा तो उसे चरित्रहीन साबित कर दिया जाएगा.

औरतें कई बार स्वभाव से कमतर होना स्वीकार लेती हैं, कई बार प्रेम में डूबकर. उनकी मांओं और दादियों ने दो पीढ़ी पहले समर्पण के नाम पर जो ग़ुलामी की, वही वो चुपचाप मुहब्बत के नाम पर कर लेती हैं. आदमी भी डूबकर मुहब्बत करते हैं पर उनकी मुहब्बत में उनकी इच्छाएं चरम पर होती हैं. बिना हाइमन चीरे प्रेम का अर्थ समझना उनके लिए मुश्किल है.




हालांकि इस दुनिया में सच्चे प्रेम और त्याग के अनेकों उदाहरण भी है. कई ऐसे पतियों को देखा है जो सालों से अपनी बीमार पत्नियों की सेवा करते आए हैं, लेकिन पंजाब की यह खबर जरुर विचलित करने वाली है. पत्नी का एक ब्रेस्ट नहीं रहे तो उसे आपके प्यार और साथ की जरुरत नहीं है? देश में हर साल सैंकड़ों महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर का शिकार हो रही हैं. पति को भी तो आगे आएं अपनी पत्नियों को इससे बचाने के लिए.

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