300 साल पुराने GB रोड के मालिकों को कहां ढूंढे SEX WORKERS ?

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Sex Workers at G B Road
G B Road
प्रियरंजन, नई दिल्ली
देह व्यापार हमारा धंधा है, भले ही किसी की नजर में गंदा हो. जीबी रोड के कोठे 300 सालों से हैं. इनके सहारे ही पिछले कई दशकों से हजारों सेक्स वर्कर्स का चूल्हा जल रहा है. बच्चे पल रहे हैं. वे स्कूल-कॉलेज जाते हैं. अपना कल संवारना चाहते हैं, रहने को छत मिली है, अब हम भला कहां जाएंगे?  जीबी रोड की सेक्स वर्कर्स ने सोमवार की सुबह चांदनी चौक से सांसद व केन्द्रीय मंत्री हर्षवर्धन के सामने अपनी यह बात रखी. इन दिनों जीबी रोड की Sex Workers और  कोठा संचालिकाओं के सामने बड़ी समस्या खड़ी है. 




कोठों को बंद कराने के लिए दिल्ली महिला आयोग ने कोठों को नोटिस (समन) दिए हैं कि वह आयोग के समक्ष उपस्थित होकर मालिकाना हक के बारे में बताए.  आयोग का मानना है कि कोठों का बंद कराना है तो उनके मालिकों पर शिकंजा कसना होगा, जो सफेदपोश बने बैठे हैं. उनका पता लगाने के लिए आयोग ने एसडीएम, दिल्ली जल बोर्ड, बिजली कंपनी आदि विभागों को नोटिस दिए, लेकिन उनसे पुख्ता रिकॉर्ड नहीं मिले. आखिरकार बिजली बिलों के आधार पर कोठों में रहने वालों को ही नोटिस जारी कर दिए. उन्हें निर्देश दिया है कि वह आयोग के समक्ष पेश होकर मालिकाना हक के बारे में बताए.




 

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इस नोटिस से जीबी रोड के कोठा संचालकों और सेक्स वर्कर्स की चिंता बढ़ गई है. उन्हें लग रहा है कि मालिकों की तलाश में उनके बेघर होने की नौबत आने वाली है. इसी सिलसिले में सेक्स वर्कर्स का समूह एक एनजीओ के साथ केन्द्रीय मंत्री से मिलने गया. उन्हें नोटिस से मची अफरातफरी और सेक्स वर्कर्स की परेशानियों के बारे में बताया. इस बाबत एक मांग पत्र सौंपा, जिसमें कहा गया है कि यदि उन्हें मनमाने ढंग से बेघर करने की कोशिश की गई तो वह विरोध-प्रदर्शन करेंगी.




भारतीय पतिता उद्धार सभा (एनजीओ) के अध्यक्ष खैराती लाल भोला के अनुसार, जीबी रोड पर सेक्स वर्कर्स 300 सालों से रह रही हैं. कोठों के असल मालिक जिंदा नहीं हैं. कोठों को सीनियर सेक्स वर्कर्स चला रही हैं लेकिन उनके पास मालिकाना हक से संबंधित दस्तावेज नहीं हैं. नोटिस के बाद उनमें बेघर होने का भय पैदा हो गया. वे अपने बच्चों के साथ कहां जाएंगी। वे भूखे मरने को मजबूर होंगी. ज्यादातर सेक्स वर्कर्स अनपढ़ हैं वह अपना पक्ष ठीक से नहीं रख सकतीं। इस वजह से दिल्ली महिला आयोग के सामने पेश होने में कतरा रही हैं.
उनका मानना है कि यदि सरकार सेक्स वर्कर्स को लाइसेंस दे तो धंधे में नाबालिग लड़कियों की एंट्री बंद हो जाएगी. खरीद-फरोख्त और शोषण बंद होगा.  सेक्स वर्कर्स बातचीत के जरिए पुनर्वास, सेटलमेंट और उनके बच्चों के भविष्य के लिए बेहतर रास्ता देने संबंधित सुझावों का स्वागत करने को तैयार हैं, लेकिन उन्होंने मनमाने तरीके से नहीं हटाया जाए.

जो स्वेच्छा से देह व्यापार कर रही हैं उनका क्या?

वहीं, जीबी रोड की कुछ सेक्स वर्कर्स और कोठा संचालक ने कहा कि महिला आयोग तो ऐलान कर दिया है कि वह जीबी रोड के कोठों को बंद करवाकर रहेंगी, लेकिन यह सोचा है कि जो महिलाएं यहां स्वेच्छा से देह व्यापार कर रही हैं, उनका क्या होगा? इन महिलाओं का कहना है कि कड़वी सच्चाई है कि जो महिलाएं पिछले कई सालों से जीबी रोड पर वेश्यावृत्ति का धंधा कर रही हैं, धंधे की आदी हो चुकी हैं. वे दूसरे काम कैसे करेंगी? सबसे पहले तो उन्हें वह काम सीखना पड़ेगा. फिर उस काम से उतनी आमदनी होगी, जितनी कोठे के सहारे होती है. यही वजह है कि ज्यादातर सेक्स वर्कर्स धंधा नहीं बदल सकती.

‘पहले पुनर्वास की योजना क्यों नहीं बनाते’

सेक्स वर्कर्स का सवाल है कि अगर दिल्ली महिला आयोग सच में उनके कल्याण के लिए कार्य कर रहा है तो पहले पुनर्वास की योजना क्यों नहीं बनाते? हैरानी होती है कि उन्हें उजाड़ने के बाद पुनर्वास करने की बात कही जा रही है. पहले पुनर्वास करेंगे तो कोठे अपने आप खत्म हो जाएंगे. अफसोस, कोठा मालिकों की तलाश के बहाने कोठा संचालक और सेक्स वर्कर्स पर दबाव बनाया जा रहा है.

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