NORWAY ने कैसे खत्म किया BABY BOTTLE का चलन?

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Gro Harlem Brundtland

Norway में ‘Baby Bottle’ ढूंढना दुर्लभ कह सकते हैं. डिजाइनदार तो छोड़ ही दें. वहां बोतल से दूध पीते बच्चे बस-ट्रेन कहीं नहीं मिलते. हर सार्वजनिक स्थलों और ऑफिसों में स्तनपान के कमरे हैं. मेरी एक कर्मचारी जब लगभग एक साल की छुट्टी के बाद लौटीं, ‘रोस्टर’ बना. मैने देखा कि एक घंटे के दो ‘पॉज़’ हैं. मुझे समझ नहीं आया, फिर देखा ‘अम्मो’ लिखा है, मतलब स्तनपान का विराम. दो घंटे प्रतिदिन का विराम है जिससे वो पास के ‘क्रेच’ में जाकर स्तनपान करा आएंगीं.




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70 के दशक में ऐसा नहीं था. पूरा नॉर्वे ‘फॉर्मूला मिल्क’ और बोतल का फैन हो चला था. नया-नया अमरीकी फैशन चला था. नॉर्वे तब अमीर न था, अमरीका की नकल उतारता था. स्तनपान लगभग न के बराबर हो रहे थे. तभी एक महिला मिसेज हेलसिंग ने एक ‘कैम्पेन’ चलाया और स्वास्थ्य मंत्रालय में एक अधिकारी से मिलीं. भाग्य से वह अधिकारी भी हार्वर्ड से इसी संबंध में शोध कर आई थीं, और उनके पेट में चौथा बच्चा था. उन्होनें अपने बच्चे का स्तनपान ही कराया, बोतल नहीं लगाया.

वही अधिकारी आगे चल कर नॉर्वे की प्रधानमंत्री बनीं, और इस मुहिम में ‘डोर-टू-डोर’ कैम्पेन में जुट गईं. प्रधानमंत्री ने आखिर खुद अपने बच्चे को दूध पिलाकर शुरूआत की थी. बात जम गई. नॉर्वे से बोतल हमेशा के लिए खत्म हो गया.

(प्रधानमंत्री का नाम था ग्रो ब्रंटलां)

 

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