2017 में वो कौन से CASES थे जो बच्चियों को बेहद डरा गई

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Cases

16 दिसंबर 2012 में  निर्भया के साथ जब गैंग रेप हुआ और उसकी मौत हो गई तो लगा कि अब महिलाओं की सुरक्षा कड़ी हो जाएगी और अब बहुत कुछ बदलेगा. 2012 से 2017 तक पांच साल गुज़र गए लेकिन महिलाओं की सुरक्षा को लेकर तस्वीर नहीं बदली. महिलाओं के साथ रेप, छेड़छाड़ अपहरण की बात तो छोड़ दीजिए अब बच्चियां भी सुरक्षित नहीं रह गई. दो साल की बच्चियों तक से रेप के Cases सामने आ रहे हैं.




National Crime Records Bureau की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर 15 मिनट में एक बच्चा यौन उत्पीड़न का शिकार हो रहा है.

हम यहां बात कर रहे हैं 2017 के कुछ ऐसे Cases कि जिसने बच्चियों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों और बच्चियों में डर पैदा कर दिया. इन घटनाओं से सबक लेकर हमें अपने बच्चियों की सुरक्षा को लेकर सजग रहने की जरुरत है.




1-गुड़िया केस

casesजुलाई में हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ पूरे देश भर में यह मामला सुर्खियों में रहा. शिमला में कोटखाई के गांव हलाईला में 15 साल की गुड़िया के साथ 4 जुलाई को गैंगरेप हुआ और फिर हत्या कर दी गई. गुड़िया के साथ हुए भयावह घटना के कारण लोगोंं में आक्रोश था.




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लोगों का आरोप था कि गुड़िया के साथ जघन्य अपराध करने वालों को पुलिस व प्रदेश सरकार बचा रही है, क्योंकि उनमें से कई युवक हाई प्रोफाइल परिवारों के हैं. चार जुलाई को स्कूल से छुट्टी होने के बाद गुड़िया अपनी सहेली के साथ स्कूल से घर के लिए निकली थी उसके बाद घर नहीं लौटी.

2-चंड़ीगढ़ में 10 साल की बच्ची को मां बनना पड़ा.

यह बच्ची मामा की हवस की शिकार हुई थी. बच्ची अपने पेट में 26 हफ्ते का गर्भ लेकर सबसे बड़ी अदालत में पहुंची थी कि उसे गर्भपात की इजाजत दी जाए क्योंकि डॉक्टरों के मुताबिक उसका शरीर इस बच्चे को जन्म देने के लायक नहीं  है और डिलीवरी से पैदा होने वाले बच्चे और मां दोनों की जान को खतरा है.

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लेकिन Supreme Court ने 10 साल की बच्ची को स्वास्थ्य संबंधी कारणों से Abortion की इजाजत नहीं दी और उसे मां बनना पड़ा.

3-12वीं क्लास में पढ़ने वाली रेप विक्टिम ने दिया बच्चे को जन्म

Casesअगस्त में महाराष्ट्र के पुणे शहर में 12th Class में पढ़ रही एक  Rape Victim लड़की ने बेटे को जन्म दिया. रेप का शिकार होने के कारण लड़की प्रग्नेंट हो गई.

17 साल की इस लड़की के पिता ने बेटी के 26 सप्ताह के गर्भ को गिराने के लिए बाम्बे हाई कोर्ट में याचिका दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने बच्ची के स्वास्थ्य को देखते हुए और गर्भपात से उसकी ज़िंदगी को खतरे के आधार पर एबार्शन की इजाजत नहीं दी थी.

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