तीन दोस्तों को कैसे मिला Girls की हर महीने की समस्या का हल ?

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napkin dispenser made by devika mehrotra

प्रियंबदा सहाय:

मुंबई के देविका मेहरोत्रा और उनके दो दोस्तों के जज्बे ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियों को पीरियड में भी बेफिक्री से स्कूल आने का रास्ता खोल दिया है. पीरियड में स्कूल नहीं आने की लड़कियों की समस्या को देखते हुए देविका मेहरोत्रा, मालिनी दासगुप्ता और अदिति आर्य ने स्कूली लड़कियों के लिए 3डी प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी से सैनटरी napkin dispenser तैयार किया है, जिससे लड़कियों को रियायती दर पर स्कूल में ही नैपकिन मिल जाए.




कथीडरल एंड जॉन कॉनन स्कूल की 12वीं क्लास की इन लड़कियों ने अपने एक्सट्रा करीकुलर के तौर पर सेंसर लगे डिस्पेंसर बनाया है. सैनटरी napkin dispenser से सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों को मात्र 10 रुपए में एक नैपकिन मिल जाएगा. पहला डिस्पेंसर उनके स्कूल के ही गर्ल्स टॉयलेट के बगल में लगाया गया है.




वुमनिया से खास बातचीत में देविका ने बताया कि उन्होंने देखा कि कोएजुकेशन स्कूल में ऐसा कोई डिस्पेंसर नहीं था जिससे पीरियड के दिनों में कई लड़कियां स्कूल से गैरहाजिर रहती थीं. इसी समस्या को देखते हुए उन्हें इस तरह के डिस्पेंसर बनाने का आइडिया आया. देविका के मुताबिक डिस्पेंसर से मिलने वाले एक नैपकिन की कीमत दस रुपए रखी गई. यानी कोई भी लड़की दस रुपए मशीन में डालकर नैपकिन ले सकती है.




देविका औऱ उनके दो दोस्तों की सोच को साकार करने में क्योरिसिटी जिम के प्रमुख गिरीश नायर से काफी मदद मिली. अब उनके इस napkin dispenser की सराहना उनके स्कूल से लेकर बाहर तक हो रही है. उनके काम को देखते हुए मुंबई के कुछ एनजीओ ने भी उनकी ओर मदद का हाथ बढ़ाया है. साथ ही म्यूनिसिपल स्कूलों ने भी उनसे ऐसी मशीनों को लगाने का अनुरोध किया है.

देविका बताती हैं कि सोशल नेटवर्किंग साइट्स की मदद से उन्होंने करीब 1500 डॉलर का चंदा भी इकट्ठा किया है जिससे स्कूलों में डिस्पेंसर लगाने का काम होगा. उन्होंने बताया कि नैपककिन खरीदने की जिम्मेदारी स्कूलों की होगी. म्यूनिसिपल स्कूलों में 10 रुपए की कीमत ज्यादा लग रही है इसलिए इसे 2 या 5 रुपए में लड़कियों को देने का प्रयास किया जा रहा है.

अब तीनों सहेलियां इस क्षेत्र में और आगे काम करना चाहती हैं. देविका की रुचि सोशल साइंस में है और वे उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने के प्रयास में है. उनका कहना है कि मैं इस क्षेत्र में और जानकारी हासिल करना चाहती हूं जिससे कि भविष्य में भी और इस पर काम कर सकूं.

 

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