सुनो-करवा चौथ को तुमने EVENT क्यों बना डाला?

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गीतांजलि गिरवाल:

निदेशक, वुमंस थिएटर क्लब: 

सुनो करवा चौथ तुम लोग अपने पति के लिए करती हो या मार्केट की जेब भरने के लिए. इत्ता दिखाव क्यों, इसको एक Event बना डाला. मार्किट भी दोनों हाथ फैलाए  तुम को खर्चने और मूर्ख बनाने के लिए तैयार होता है.  यार इत्ता दिखावा पूजा के नाम पर फ़ैशन और ब्रांड्स का बोल बाला हद है.




यार, सोचो तुम किस संस्कृति को जन्म दे रही हो? बाजारवाद हावी है तुम्हारे ऊपर और जब यही बाजारवाद तुम्हे लूटता है, तब हाय-हाय करते हो. हर चीज़ को पैसे व स्टेट्स से तौलना कहां तक सही है? 15 दिन पहले से ही एक लहर दौड़ाई जाती है. प्रतिस्पर्धा होती है एक दूसरे से. कौन क्या और कितना महंगा पहन रहा है.




ऊपर से नीचे तक लद-फद के पैसों का विज्ञापन किया जाता है. हर चीज़ का पैकेज, मेहंदी से लेकर चूड़ी तक और करवा से लेकर भगवान तक बिक गए. 4 दिन पहले से पार्लर के चक्कर, व्रत वाले दिन दोपहार से सजने का होड़, पूरा घर सर पर उठाए घूमती हो.




मैचिंग के चक्कर में मार्केट के चक्कर पर चक्कर और पति चुपचाप ये तमाशा सहने और देखने के लिए मजबूर.  मुँह खोला तो दकियानूसी का ख़िताब तैयार. ये दिखावा है मात्र, कोई पूजा पाठ या तप नही है. ख़ुद से और पति से छलावा कर रही हो, प्यार के नाम पर सौदा करती हो.

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Event
गीतांजलि गिरवाल , निदेशक, वुमंस थिएटर क्लब

“जानू, मुझ से प्यार करते हो तो plzz इस बार ये दिलाना, वो दिलाना. पता है मेरी सहेली फला पार्लर जा रही है, मैं भी जाऊ, plzz जानू,” “क्या तुम को अच्छा लगेगा कि सब मेरा मज़ाक उड़ाए? तुम्हारे लिए व्रत रख रही हूं और तुम इतना भी नही कर सकते- ऊंह. लो शुरू हो गयी घर में महाभारत.

अरे मत करो ऐसा व्रत. कौन सा अहसान कर रही हो, भावनात्मक रूप से छल रही हो पति को. वो भी बेचारा सोचता होगा कि ये कैसा करवा चौथ का व्रत जो घर की शांति भंग कर दे. यदि नही भी मांगती होगी तो पति बेचारा दबाव महसूस तो करता ही होगा. शरमा कर वो कुछ तो खर्च करेगा ही और तुम इन सब को अपना स्टेट्स इश्यू बना कर इसे नारी की स्वत्रंत्रता और फेमिनिज़्म से जोड़ देती हो हद है.

व्रत करना है तो घर में करो, पूरा दिन साथ में हाथ में हाथ डाल कर नई पुरानी यादों को ताज़ा करो. रिश्ते में गर्माहट भरो, प्यार को प्रगाढ़ बनाओ. ना कि मार्किट के करवा चौथ व्रत के पैकेज में उलझ कर ख़ुद को मूर्ख साबित करो. सोसायटी, क्लब, स्टेट्स में रह कर मात्र दिखावा किया जा सकता है व्रत नहीं. ऐसे व्रत करने से तो ना करना अच्छा और जो ये सब नही करती, उन्हें हेय दृष्टि से देखते हो तुम लोग. बहनजी, नीरस और उबाऊ का ख़िताब देती हो.

कुछ तो महान दिखाने के मोह में पड़ कर घर में खा पी कर, बाहर व्रत का दिखावा करती हैं. व्रत वाले दिन भी दूसरों के मेकअप, गहने, कपड़ो पर टकटकी लगा कर रखती हो. भड़ास निकालने के लिए जी भर कर उसकी बुराई कर खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित करने का फ़ूहड़ प्रदर्शन करती हो. अरे-प्रगतिशील हो तो सोच भी प्रगतिशील रखो, ये दिखावे से बाहर निकलो.  सच्चे दिल से पति की आंखों में देख कर मुस्कुरा भर देना, 16 श्रृंगार की सुंदरता चेहरे को तेजोमय कर देगी.

 

(साभार-फेसबुक वॉल)

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