छैला, छैलछबीला, छैलबिहारी जैसे शब्दों पर न आ जाए कहीं COURT का फैसला?

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'रा-वन' फिल्म के गीत-छम्मकछल्लो में करीना और शाहरुख
'रा-वन' फिल्म के गीत-छम्मकछल्लो में करीना और शाहरुख

अजित वडनेरकर:

(लेखक और वरिष्ठ पत्रकार)

एक साहब ‘मान्यवर’ कहने पर तन्ना जाते थे, एक खुद को ‘श्रीमानजी’ कहे जाने पर बुरा मान जाते थे. पड़ोस की सास-बहु में हमेशा ठनी रहती है. बहु को ऐतराज है कि सास उसे ‘महारानी’ कहती हैं. आने वाले दिनों में छैला, छैलछबीला, बिहारी, छैलबिहारी, उस्ताद, गुरूघंटाल जैसे अनेक शब्दों पर Court में फ़ैसले आ सकते हैं.




कुछ अश्लील नहीं

भाषाप्रेमी होने के नाते इतना ही कह सकता हूं कि छम्मकछल्लों में कुछ भी अश्लील नहीं है. बुनियादी तौर पर ये लक्षणों के आधार पर बनी संज्ञा है. छम्मकछल्लों दरअसल युग्मपद है. छम्मक+छल्लो. यूं देखा जाए तो सही पद है छमकछल्लो. मुखसुख के चलते छल्लो की तर्ज़ पर छमक भी छम्मक हो गया. इसे समझने के लिए पहले छम्मक की बात करते हैं फिर छल्लो की..

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छम-छम, छम-छम

यूं तो सिर्फ घुंघरुओं के टकराने से रुन-झुन ध्वनि होती है किन्तु पाजेब के घुंघरुओं की आवाज़ के लिए छमछम शब्द है. यह अनुकरणात्मक शब्द है अर्थात घुंघरुओं के आपस में टकराने की जो ध्वनि है, उस ध्वनि के अनुकरण पर गले से निकली वैसी ही ध्वनि को संज्ञा दे गई. पाजेब के एक बार बजने की ध्वनि छम् है.

 

धम से धमक, छम से छमक

जिस तरह धम् ध्वनि से धमक बनता है, चम से चमक बनता है उसी तरह छम् से छमक संज्ञा बन रही है जिसका अर्थ है पाजेब के घुँघरुओं की समवेत ध्वनि. झनकार. इसमें निहित भाव का ही विस्तार है छम छम करते घुँघरुओं के साथ किसी सुन्दर सजीली स्त्री का ठसक के साथ चलना। इस छम-छम से जो नाज़ो-अंदाज पैदा हो रहा है, जिस बनी-ठनी, बांकी चितवन वाली नखराली नायिका की छवि उभर रही है, उसे किसी व्याख्या की ज़रूरत नहीं है.




छैला, छैलछबीला

अब आते हैं छमकछल्लो के आखिरी हिस्से छल्लो पर. हिन्दी का एक शब्द है छैल, छैला. बांके-सजीले युवा अथवा युवती के लिए हिन्दी में छैल-छबीला या छैल-छबीली जैसे शब्द हैं. मज़े की बात यह कि छैल और छबीला ये दोनों ही शब्द छवि से ही बने हैं. जिसका अर्थ होता है रूप, सुंदरता, चमक आदि. दरअसल छवि में निहित छाया को समझना चाहिए. छाया का अर्थ होता है प्रतबिंब, अक्स, समरूप आदि. इसके अतिरिक्त छवि शब्द में निहित रंगरूप और चमक जैसे भाव भी इसमें शामिल हैं.

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छैली यानी छल्लो

दरअसल इसी ‘छैला’ शब्द का स्त्रीवाची है ‘छल्लो’ और ‘छैली’. प्राकृत में छयल्ल/ छविल्ल/ छबिल्ल से ही छैल, छैला जैसे रूप विकसित हुए और छबीला और छबीली भी. छबीला शब्द ऐसे नौजवानों के लिए इस्तेमाल होता था जो न सिर्फ रूपवान थे बल्कि चुस्त, खुशमिजाज़, रसिक बातूनी और खूब बन-ठनकर रहने के आदि होते थे. तो इन्हीं गुणों के आधार पर हिन्दी के शब्द भंडार को समाज ने एक नया शब्द दे दिया छैल-छबीला. छैलाबाबू जैसे शब्द भी चल पड़े. भगवान श्रीकृष्ण के लिए भी छैलबिहारी शब्द कहा जाता है.




छमकछल्लो की चाल देखें

तो स्पष्ट है, छमक के साथ जुड़ा छल्लो, दरअसल ‘छवि’ से उपजे छयल्ल का ही विकास है जिसका अर्थ है सुन्दर. छमक में नाज़-अंदाज़ वाली चाल का भाव है. कुल मिलाकर छमकछल्लो में अगर खुद में मगन, रूपगर्विता का भाव है, तो इसे अश्लील कैसे कहें !! आत्ममुग्ध भाव से, इठलाते हुए, अनजाने में ऐसी स्त्री की ठोकर से किसी का नुकसान हो जाए, तो वह उसे छमकछल्लो न कहे, तो क्या कहे ???

(शब्दों का सफ़र पुस्तक के लेखक)

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