बहुत शुक्रिया दोस्तों, आपने उस ISSUE पर साथ दिया जिस पर लोग अक्सर चुप रह जाते हैं

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Issue
मानसी चड्ढा

प्रतिभा ज्योति:

संपादक:

Big Thanks.  दोस्तों आप सब का बहुत शुक्रिया. वुमनिया की आवाज में आप सबने एक साथ आवाज मिलाई. उस Issue पर हमारा साथ दिया, जिस पर अक्सर समाज में चुप्पी छाई रहती है. ‘शादी की पहली रात मैंने सफेद तौलिए पर दिया VIRGINITY TEST’ इस पर हमें उम्मीद से अधिक प्रतिक्रियाएं मिलीं. यह महज किसी एक लड़की की कहानी नहीं थी. यह उन सैंकड़ों लड़कियों की कहानी है जो इस प्रताड़ना से गुजरती है, लेकिन कभी मां-बाप की खुशी, कभी शादी बचाने के दबाव तो कभी ‘लोग क्या कहेंगे’ के डर से चुप हो जाती है.




हमने कई लड़की की आपबीती सुनी है कि शादी की पहली रात उससे पूछा गया कि क्या तुम किसी लड़के को पसंद करती थी, क्या तुम्हारे संबंध थे, क्या तुम वर्जिन हो? जिस लड़की ने ईमानदारी से अपनी नई जिंदगी शुरु करने के भावावेश में आकर अपने मन की बात बता दी वो कभी अपने पति के मन में बस नहीं पाई. लेकिन वही लड़की कभी हिम्मत करके अपने पति से पूछ नहीं पाई कि क्या आप वर्जिन है क्या आपके किसी लड़की को पसंद करते थे?

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हम सैल्यूट करते हैं मानसी के साहस को, जिसने अपनी कहानी दुनिया को बताकर न जाने कितनी लड़कियों के मन को झंकझोर दिया होगा, न जाने कितनी लड़कियों का दर्द एक बार फिर उभर गया होगा. ये दौर है उन लड़कियों का जो खूब पढ़ती हैं, खूब खेलती-कूदती हैं, मेडल लाती है, साईकिल से स्कूल-कॉलेज जाती है, एडवेंचर कैंप में हिस्सा लेती है, हाइमन किसी भी वजह से टूट सकता है, यह लड़कियों के चरित्र को नापने का पैमाना क्यों बन गया? 




हमारी एक व्यूअर और मित्र रीवा सिंह ने ठीक ही लिखा है सेक्स ही हाइमन तोड़ने का एकमात्र तरीका नहीं है. कई कारणों से हाइमन ब्रेक हो जाता है. कई बार सेक्स के दौरान भी हाइमन नहीं टूटता और फिर उसे ऑपरेट कराना पड़ता है लेकिन समाज इसके पीछे का विज्ञान नहीं समझना चाहता. लड़कों की वर्जिनिटी पर कोई बात नहीं करता क्योंकि समाज की सारी इज़्ज़त लड़कियों के हाइमन के भीतर होती है.




मानसी के साहस और उनकी स्टोरी पर हमारे कुछ व्यूअर की प्रतिक्रियाएं पढ़िए…

अवनीश चौधरी ने लिखा- आप हिम्मत, साहस और धैर्य की मिसाल हैं

रितु शर्मा ने कमेंट किया- Dis shows dat sm people in India are only have d education..bt their minds are narrow minded . Dey r modern only by their clothes nd style but not by their minds. Today v r only growing up by improvising resources. I m so depressed to b a part of dis rural nd narrow minded India

 
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