BHU VIOLENCE : तू लड़की है, पढ़ती है और बोलती है यही बड़ी गलती है

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Violence
Savita Upadhyay

सविता उपाध्याय:

(बीएचयू की पूर्व छात्रा)

बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (BHU) पिछले तीन-चार दिनों से अशांत है. यौन-उत्पीड़न के विरोध में शुक्रवार को सैकड़ों छात्राएं धरना-प्रदर्शन कर रहीं थी और कुलपति को बुलाने की मांग पर अडी थीं. शनिवार रात तब Violence भड़की जब कुलपति आवास पर प्रदर्शन करने पहुंचे छात्र-छात्राओं पर बीएचयू के सुरक्षाकर्मियों ने लाठीचार्ज किया.




इसके बाद हालात बेकाबू हो उठे. पूरी रात तोड़फोड़, पथराव और आगजनी के बीच पुलिस और छात्रों के बीच गोरिल्ला युद्द चलता रहा. पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ी. बीएचयू परिसर छावनी में तब्दील हो गया है. देर रात सर्च आपरेशन के बाद गर्ल्स हॉस्टल समेत तमाम हॉस्टलों से आधे से अधिक छात्र घर जा चुके हैं.

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बीएचयू हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों का आरोप है कि पुलिस ने लाठीचार्ज किया और उन्हें जानवरों की तरह मारा गया. उनका कहना है कि ‘हमारे साथ ऐसा व्यवहार किया जा गया मानो हम आतंकवादी हो. यूनिवर्सिटी में छुट्टी घोषित होने और हास्टल खाली कराने का आदेश मिलने के बाद रविवार की सुबह से छात्राएं अपने-अपने घर जाने लगी थीं.

सिंहद्वार के पास अपने सामान के साथ खड़ी छात्राओं के चेहरे पर गुस्सा साफ़ नज़र आ रहा था. घटना के बारे में कोई भी चर्चा करने वे फूट पड़ रही थीं. उनका कहना था कि लड़कियों पर लाठीचार्ज कराया गया है अब इससे अधिक शर्मनाक क्या होगा?




हालत यह हो गए थे हिंसक घटनाओं के बाद ज्यादातर गर्ल्स हास्टल की छात्राएं डरी-सहमी हुई थी. रविवार को त्रिवेणी हास्टल के अंदर  एक भी वार्डेन मौजूद नहीं थी. लड़कियां हैरानी जता रही थींं जो वार्डेन लड़कियों के किसी भी मुद्दे पर आवाज उठाने पर कभी डिपार्टमेंट तो कभी घरवालों से इसकी शिकायत करने की धमकी देकर उनकी आवाज़ बंद करवा देती थीं आज जब सुरक्षा के नाम पर लड़कियां सड़कों पर उतरी तो हास्टल से वार्डेन ही गायब होने लगी.

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मैं खुद बीएचयू की पूर्व छात्र रही हूं और यूनिवर्सिटी में महिलाओं-छात्राओं के प्रति प्रशासन के नजरिए से अच्छी तरह वाफिक हूं. अगर बीएचयू प्रशासन की भाषा में इस पूरी घटना का सार देखें तो हम प्रशासन का विवरण कुछ यूं पायेंगे जो लड़कियों को संबोधित करते हुए होगा-    

“गलती थी उस लड़की की जिसने अपने साथ हुई घिनौनी हरकत के लिए आवाज उठाई और उससे भी ज्यादा तो वे लोग गलत हैं जो उसका साथ दे रहे हैं. चुप रहना चाहिए था औरतों  का शरीर होता ही किस लिए है? पुरुषों के मनोरंजन के लिए ही तो, तभी तो कुर्ती में हाथ डाल दिया लड़का तो इतना बवाल क्यों? पागल कहीं की लगता है कुछ ज्यादा ही पढ़ ली है इसीलिए दिमाग खराब हो गया है.




तभी तो कहा गया है कि लड़कियों को ज्यादा पढ़ना नहीं चाहिए एक उम्र बाद शादी करके जिम्मेदारी डाल देनी चाहिए जिससे इन फालतू चीजों में दिमाग न चलाए. मजा आया न लाठी खाकर और उड़ो, काट दिए गये न पर. सौ बार समझाया गया है की छह बजे के बाद बाहर नहीं निकलना चाहिए फिर क्यों निकली बाहर? तू तो खुद ही चरित्रहीन है और चली है इन बेचारों लड़कों पर इल्ज़ाम लगाने

तू झूठ बोल रही है क्योंकि हम लोग तो निशान देखकर ही भरोसा करेंगे. भगवान थोड़े ही हैं हम जो तेरी मानसिक स्थिति समझेंगे. तू जरुर किसी राजनितिक पार्टी का हिस्सा बन चुकी है तभी इतना बवाल काट रही है. कितनी बदनामी करवा दी तूने बीएचयू जैसे संस्थान की.”

 

 

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