ये किस चक्कर में पड़ रही हैं आप?

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smoking addiction
smoking addiction

प्रियंवदा सहाय:

तंबाकू सेवन रोकने लिए बेशक बड़े- बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं लेकिन पुरुषों के साथ महिलाएं भी इसकी गिरफ्त में बुरी तरह फंस चुकी हैं. एक सर्वे के मुताबिक़ देश में 20 फीसदी महिलाएं सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों का शौक रखती हैं. वहीं स्कूल-कॉलेज आने-जाने वाली लड़कियों में भी इसका चलन तेजी से बढ़ रहा है. जबकि ऐसा कहने से महिलाओं के प्रजनन क्षमता पर तेजी से असर पड़ता है और प्रिग्नेंट महिलाएं यदि सिगरेट या अन्य तंबाकू उत्पाद लें तो इससे उसके बच्चे की सेहत पर भी बुरा असर पड़ सकता है.  




वैश्विक व्यस्क तंबाकू सर्वेक्षण (गेटस) के मुताबिक़ देश की दस फीसदी लड़कियों ने स्वंय सिगरेट पीने की बात को स्वीकारा है. वहीं विश्व स्वास्थय संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट ग्लोबल टोबैको एपिडेमिक के अनुसार महिलाओं के बीच smoking addiction का चलन लगातार बढ़ता जा रहा है. 2010 में यह सर्वे हुआ तब 34 फीसदी लोग किसी न किसी रुप में तंबाकू का सेवन कर रहे थे. किशोर उम्र में सिगरेट पीने वाले 50 फीसदी लड़के-लड़कियां कम उम्र में ही तंबाकू से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित होकर मौत के शिकार हो जाते हैं. औसतन स्मोकिंग करने वाले व्यक्ति की आयु स्मोकिंग नहीं करने वाले व्यक्ति की तुलना में 22 से 26फीसदी तक घट जाती है. सर्वे पर ग़ौर करे तो टीएनएज लड़कों में तंबाकू का सेवन शुरु करने की औसत आयु 17 साल है जबकि टीएनएज लड़कियों में यह आयु 14 साल है.




विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ ) ने तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों से होने वाली बीमारियोंऔर मौतों की रोकथाम को ध्यान में रखकर वर्ष 2017 की थीम ‘विकास में बाधक तंबाकू उत्पाद’  रखा है. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक एक सिगरेट जिंदगी के 11 मिनट और पूरा पैकेट तीन घंटे चालीस मिनट तक छीन लेता है. तंबाकू और धूम्रपान उत्पादों के सेवन से देश भर में प्रतिघंटा 137 लोग अपनी जान गंवा रहे हैं. वहीं दुनिया में प्रति 6 सेकंड में एक व्यक्ति की मौत हो रही है. यदि प्रिग्नेंट महिला सिगरेट पीती है तो उसके बच्चे के हेल्थ पर भी इसका असर बुरा असर पड़ता है.




मैक्स फाउंडेशन के कैंसर रोग विशेषज्ञ डा.हरित चतुर्वेदी ने बताया कि तंबाकू उद्योग के जरिए युवा पीढ़ी को आकर्षित करने के रोज नए प्रयास किए जा रहे हैं. इस इंडस्ट्री का मकसद है ‘युवावस्था में ही उन्हें पकड़ो’. युवाओं के सामने तंबाकू उत्पादों को आधुनिकता, श्रेष्ठता और अमीरी के पर्याय के रुप में दिखाया जाता है जबकि तंबाकू उत्पादों के सेवन से मरने वालों की संख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है.

डॉ चतुर्वेदी बताते हैं कि हाल में हुए एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि संभवतया तंबाकू का सेवन करने वालों के जीन में भी आंशिक परिवर्तन होते हैं जिससे केवल उस व्यक्ति में ही नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों में भी कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है. इन उत्पादों के सेवन से जंहा पुरुषों में नपुंसकता बढ़ रही है वहीं महिलाओं में प्रजनन क्षमता भी कम होती जा रही है.  वे बताते हैं कि तंबाकू चबाने से मुंह, गला. आमाशय और फेफड़े का कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है. जिसका इलाज बहुत महंगा और जटिल है.

 

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