हम सैंडिल मार्च की जगह CANDLE MARCH क्यों निकालते हैं?

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Candle March

मेदिनी पांडेय:

एक चमन बहार नेता उठकर आता है और मायावती जैसी सशक्त औरत पर भी कोई आपत्तिजनक कमेंट करके चला जाता है. दिल्ली पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित बयान देकर जाती हैं कि उन्हें भी असुरक्षा महसूस होती है दिल्ली की सड़कों पर. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की कीमत गुरमेहर कौर बलात्कार की धमकियां सुनकर चुकाती हैं. आईएएस के बेटी सुरक्षित नही है, गाड़ी में चलती लड़की सुरक्षित नही है, तो एक सामान्य सड़क चलती लड़की कितनी सुरक्षित है यहां?




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दिन में होती छेड़छाड़ और बलात्कार नियंत्रित होने का नाम नही लेते और आप निर्देश देते हैं कि रात को लड़कियां बाहर न निकलें. दिन में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आपने क्या इंतज़ाम किए? ठीक है रात में नही निकलते दिन में ही निकलेंगे लेकिन दिन की सुरक्षा की क्या गारंटी देते हैं आप?




दो कौड़ी की मानसिकता वाले नेताओं की लड़कियों के विषय में बेख़ौफ़ वाहियात बयानबाजी इसलिए भी खूब आ रही हैं क्योंकि लड़कियां राजनैतिक और सामाजिक रूप से सक्रिय नही हैं, लड़कियां अपना सामूहिक विरोध नही जता रही ऐसे बयानों पर. लड़कियां आज भी सैंडल मार्च के बजाय Candle March कर रही हैं.




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अब वक़्त आ गया है कि अभिभावक लड़कियों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी पूरी तरह उठा लें. लड़कियां रात में सड़कों पर सुरक्षित नही हैं. इसलिए अब अभिभावकों की ज़िम्मेदारी बनती है कि वे अपने मनचले बेटों को देर रात घरों से न निकलने दें.

(साभार-फेसबुक वॉल)

 

 

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