खोई PRINCESS कैसे लौटी अपनी दुनिया में?

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भावना झा:

कालेज में उसका निकलना ही फुसफुसाहट शुरु कर देता था. लड़कों में ही नहीं, लड़कियों में भी उसका रूप, उसकी हाज़िरजवाबी, उसके बोलने का स्टाइल और सबसे अहम बात उसका अव्वल रिज़ल्ट सबसे ऊपर होता था. नाम था राजकुमारी गुप्ता. लोग उसे प्यार से Princess भी कहकर पुकारते थे. उसकी ड्रेसिंग सेंस का हर कोई दीवाना था. रोजाना जिमिंग से उसका शरीर और आकर्षक हो गया था. लड़कों की निगाहें कभी उसके टॉप पर अटक कर उलझ जाती तो पीछे से देखने वाले भी आहें भरते रहते. घर में तो वो थी ही सबकी राजकुमारी, लाड़ प्यार और नाज नखरों में पली.

गुप्ता परिवार का अच्छा खासा बिजनेस था, लेकिन वो जॉब करना चाहती थी. कॉलेज से निकलने के बाद उसे अच्छा जॉब मिलने में कोई परेशानी भी नहीं हुई. आफिस में भी उसे तेजी से आगे बढ़ने का मौका मिला हर कोई उसके काम और रफ्तार की तारीफ करता. गुप्ता परिवार अब उसकी शादी के लिए चिंतित था.




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उसने अभी तक किसी को अपने दिल में बिठाया नहीं था. वक्त के साथ रिश्ते भी आने लगे.  उसे भी सपनों सा राजकुमार चाहिए था जो उसे प्रिसेंस की तरह रखे पलकों पर बिठा कर. जल्दी ही अश्विनी से शादी हो गई. शानदार समारोह में शहर का हर बड़ा आदमी उस शादी में मौजूद था और दर्जनों ऐसे लोग भी अश्विनी की किस्मत से रश्क कर रहे थे.
 

ससुराल में कुछ दिन तो बड़े मज़े से बीते, लेकिन जैसे ही वे हनीमून से लौटे तो उसे समझ आया कि ससुराल और मायके में क्या फ़र्क होता है. सास के व्यवहार में इतनी दूरी थी कि उसे पाटना मुश्किल लगता उसे. मायके में तो उसके नखरे ही खत्म नहीं होते थे, मम्मी और पापा हर बात का ध्यान रखते लेकिन सुसराल में आकर उसे लगा कि कोई उसे देखने वाला ही नहीं है.

अश्विनी सवेरे ही अपने पापा के साथ ऑफिस निकल जाता. उसे नौकरी छोड़ने का आदेश सुना दिया गया था. खाली बैठने से उसे घर काटने को दौड़ता दौड़ता. सासू मां बात-बात पर उससे गुस्सा होती दिखती और रात को जब अश्विनी लौटता तो वो सिर्फ़ अपने पति होने की जरुरतों को पूरा कर करवट बदल सो जाता. उसके मन की बात मन में रह जाती. मायके में बता कर उन्हें दुखी नहीं करना चाहती थी वो.




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धीरे धीरे उसका आत्म विश्वास जवाब देने लगा था. एक दिन उसकी सबसे खास सहेली प्रियंका उससे मिलने आई. उसका चेहरा देख कर प्रियंका ने पूछा कि सच बता क्या हुआ है, मेरी वो कान्फीडेंट, ब्यूटीफुल राजकुमारी को? वो रो पड़ी उसने अपने दिल का पूरा हाल उसे बता दिया.
 

प्रियंका ने कहा इसमें तुम्हारी भी गलती है. तुम अपनी कीमत ही नहीं समझती. जानती हो तुम क्या थीं और आज क्या हो गई हो. प्रियंका ने अपने पर्स से दो हज़ार का एक करारा नोट निकाला और उसे मोड़-मोड़ कर राजकुमारी से पूछा कि अब इस नोट की क्या कीमत है? हैरान होकर उसने कहा मोड़ने से नोट की कीमत थोड़े ही बदल जाएगी? प्रियंका हंसी बोली, यही तुम्हें समझना है. तुम्हारी कीमत आज भी वही है. अपने ऊपर भरोसा करना सीखो. कोशिश करोगी तो परिवार में तालमेल बिठाने के साथ-साथ अपने लिए भी जी पाओगी. प्रियंका की बात ने उस पर जादूई प्रभाव डाला.




उसने सबसे पहले अश्विनी से बात करने की सोची. रात में उसके घर लौटने पर उसने प्यार से उसे समझाया कि वो नौकरी करना चाहती है, पैसों के लिए नहीं बल्कि अपनी खुशी के लिए.  कई हफ्तों तक अश्विनी ने कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन उसने अपना धैर्य नहीं खोया और पति को मनाने और काम ढूंढने का सिलसिला जारी रखा. करीब तीन महीने बाद अश्विनी आज खुद उसे ऑफिस छोड़ने आया था..आज उसकी ज्वाइनिंग थी..

(यह एक सच्ची स्टोरी है. विशेष अनुरोध पर पात्रों के नाम बदल दिए गए हैं. यदि आपके पास भी है कोई अपनी या किसी की भी स्टोरी तो हमें लिखें womeniaworld@gmail.com. हम आपकी स्टोरी को प्रकाशित करेंगे.)   

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