सरकार की सलाह- ‘प्रेग्नेंट महिलाएं न खाएं मीट, न करें सेक्स’

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कविता सिंह:

‘महिलाएं प्रेग्नेंसी में मीट न खाएं, कंसीव करने के बाद सेक्स न करें, गंदी आदतों और विचारों से दूर रहें, आध्यात्म में मन लगाएं और घर की दीवारों पर सुंदर तस्वीरें लगाएं..’.ये हम नहीं कह रहे हैं.  केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय ने गर्भवती महिलाओं को ऐसे सुझाव दिए हैं.

खबरों के मुताबिक योग दिवस मनाए जाने के बीच भारत सरकार के सहायता प्राप्त संस्था काउंसिल फॉर रिसर्च इन योगा एंड न्यूरोपैथी ने एक बुकलेट ‘मदर एंड चाइल्ड केयर’ जारी की है जिसमें प्रेग्नेंट महिलाओं को यह सुझाव दिए गए हैं. इस बुकलेट को आयुष मंत्रालय के राज्यमंत्री श्रीपद नाइक ने पिछले सप्ताह राष्ट्रीय स्वास्थय संपादकों के सम्मेलन में जारी किया था, जिसकी एक्सपर्ट्स आलोचना कर रहे हैं.

प्रोटीन की कमी, कुपोषण और एनिमिया प्रेग्नेंट महिलाओं के हेल्थ के लिए चिंता का विषय होता है और इसलिए मीट भी खाने की सलाह दी जाती है क्योंकि इसमें प्रोटीन और आयरन भरपूर मात्रा में मिलता है.

‘वहीं सेक्स की बात की जाए तो नार्मल प्रेग्नेंसी में यह पूरी तरह सेफ है. कुछ केसे में पहली तिमाही में सतर्क रहने की सलाह दी जाती है. इसके अलावा डॉक्टर्स यही सलाह देते हैं कि प्रेग्नेंसी में महिलाएं अधिक से अधिक खुश रहें और परिवार उनका ख्याल रखे.’  

प्रेग्नेंसी के दौरान ऐसी डाइट की सलाह देते हैं एक्सपर्ट्स…

1-फल और सब्जियों का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें. इनमें बच्चे को विकसित करने के लिए जरूरी सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं.

2-प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को आयरन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. आयरन ब्लड में ऑक्सीजन के प्रवाह को संतुलित रखता है. आयरन की कमी से एनीमिया जैसी बीमारी हो सकती है. इसका मतलब है खून की कमी. प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए अलग से आयरन सप्लीमेंट लेना जरूरी होता है.

वैसे, बेहतर है कि हरी पत्तेदार सब्जियां, अंकुरित अनाज और फल लें. इनमें आयरन की पर्याप्त मात्रा होती है. अगर आप मीट खाती हैं तो बेहतर होगा इसे खाने के बाद एक गिलास ऑरेंज जूस या नींबू पानी लें. इनमें विटामिन-सी होता है और यह डाइजेशन में अहम भूमिका निभाता है.

3- प्रेग्नेंट महिलाओं को खूब पानी पीने की सलाह दी जाती है. पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से  शरीर में मौजूद टॉक्सिन निकल जाते हैं और त्वचा भी स्वस्थ रहती है.

4- फोलेट, फॉलिक एसिड का प्राकृतिक रूप से हरी सब्जियों, संतरे, मसूर की दाल और पौष्टिक नाश्ते में  भरपूर मात्रा में पाया जाता है. प्रेंग्नेंट महिलाओं के लिए पहले तीन महीनों में इसका सेवन सबसे ज्यादा आवश्यक होता है. फॉलिक एसिड पर्याप्त मात्रा में लेने से यह बैक पैन से बचाता है.

5- प्रेग्नेंट महिलाओं को थोड़ी-थोड़ी देर में बादाम, ताजे फल या अन्य हेल्दी अनाज का सेवन करते रहना चाहिए. प्रेग्नेंसी के दौरान किसी खास चीज को खाने का दिल ज्यादा करने लगता है. ऐसे में किसी एक ही चीज को खाने के बजाय बाकी चीजों को भी खाने में शामिल करने की सलाह दी जाती है. दरअसल, बच्चे को वही मिलता है, जो मां खाती है, इसलिए देर तक भूखे नही रहने की सलाह दी जाती है.

 

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