जो औरत का दर्द नहीं समझता, भगवान उसे मर्द नहीं समझता’

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कविता सिंह:

इन दिनों जहां जीएसटी में सेनेटरी पैड्स को टैक्स फ्री किए जाने को लेकर फैसला लिया जाना बाकी है वहीं, इस सैनेटरी पैड्स को आधार बनाकर बॉलीवुड एक नहीं बल्कि दो-दो फ़िल्में लेकर आ रही हैं. इन फिल्मों के नाम हैं ‘पैडमैन और फुल्लू’. सबसे पहले जाने-माने फिल्ममेकर आर बाल्की पैडमैन को लेकर चर्चा में आए. इस फिल्म की शूटिंग पिछले तीन महीने से एमपी और देश के अन्य हिस्सों में जारी है.

‘पैडमैन’ में अक्षय कुमार, सोनम कपूर और राधिका आप्टे के अलावा अमिताभ बच्चन भी नजर आएंगे. यह फिल्म रियल लाइफ स्टोरी पर बेस्ड है. यह अरुणाचलम मुरुगानाथम नाम के एक छोटे से बिजनेसमैन की कहानी है जिसमें गांव-देहात की महिलाओं के लिए कम बजट में सैनेटरी नैपकिन बनाकर जागरूकता फैलाई.

दरअसल अरुणाचलम नहीं चाहते थे कि गांव की बाकी महिलाएं सेनेटरी नैपकिन से वंचित रहें जैसे कि कभी उनकी पत्नी रहती थीं. अपनी पत्नी की परेशानी को समझते हुए ही अरुणाचलम ने कम दाम में पैड्स बनाए और उन्हें गरीब और जरूरतमंद औरतों को दिया. अक्षय कुमार इस फिल्म में अरुणाचलम का लीड रोल प्ले कर रहे हैं. फिल्म अगले  साल 26 जनवरी 2018 को रिलीज़ होगी  मगर कहानी में ट्विस्ट है. इसी विषय पर सेम फिल्म फुल्लू भी रिलीज़ होने वाली है.

हाल ही में इस फिल्म का पोस्टर और ट्रेलर सामने आया है. कहा जा रहा है कि फुल्लू पिछले दो साल से बन रही थी. इस फिल्म में शारिब अली हाशमी, ज्योति सेठी और नूतन सूर्या मुख्य भूमिका में नजर आयेंगे. फिल्म के डायरेक्टर अभिषेक सक्सेना हैं. भले ही इस फिल्म में अक्षय की फिल्म के मुकाबले कोई नामचीन या बड़े कलाकार नहीं हैं लेकिन फिल्म के नए पोस्टर्स काफी इनोवेटिव हैं जिसमें लीड स्टार शारिब को नैपकिन पर सोते हुए दिखाया है. इसमें टैग लाइन लिखी है, ‘जो औरत का दर्द नहीं समझता, भगवान उसे मर्द नहीं समझता’.

फुल्लू 16 जून को रिलीज़ होने वाली है, ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह फिल्म अक्षय की फिल्म को नुकसान पहुंचा पाएगी या अक्षय का स्टारडम पैडमैन को बचा ले जाएगा. ये भी देखना होगा कि आगे क्या होता है? वैसे कोई भी फिल्म चले इसमें फायदा उन दर्शकों का होगा जो कि ऐसे विषयों पर सार्थक फिल्में देखना पसंद करते हैं. बॉलीवुड को ऐसे ही और विषयों पर फिल्में बनाने की जरूरत है जो कि समाज में बदलाव ला सकें और लोग प्रेरित हो सकें. वैसे भी पीरियड्स, सेनेटरी नैपकिन्स पर बात करना भी इंडिया में अछूत के समान माना जाता है और लड़कियों से इस कारण कई भेदभाव किए जाते हैं. 

 

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