VEERE DI WEDDING- जिस बात के लिए मर्दों का विरोध करती हैं, औरत हो कर भी खुद के लिए वही गालियां निकालती हैं

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Veere Di Wedding
Veere Di Wedding
प्रितपाल कौर
वरिष्ठ पत्रकार और लेखिका:
हाल ही में रिलीज हो रही फिल्म ‘Veere Di Wedding’ का ट्रेलर देख कर मन में यह बात आई कि जिस बात के लिए हम अब तक मर्दों का विरोध करते हैं, औरत हो कर खुद के लिए भी ऐसी गालियों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

कुछ महिला दोस्त हैं जो आपस में बात करती हुई खुले शब्दों में पुरूषों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली मां बहन की गालियों का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रही हैं.




यानी औरत हो कर भी ‘मां बहन’ की गाली दी जा रही.  मन में ख्याल आया कि बहुत हो गया. अब वक्त आ गया है कि नई गालियों का आविष्कार हो.
Prtipal Kaur

फिल्म ‘Veere Di Wedding (वीरे दी वेडिंग)’ का ट्रेलर देख कर हो सकता है कि स्त्री पुरुष बराबरी का झंडा फहराने वालों को ये कदम क्रांतिकारी लग सकता है, लेकिन इससे एक अहम सवाल भी उठ खडा होता है.

जिन स्त्री विरोधी बातों और हरकतों के लिए हम पुरूषों की आलोचना करते आए हैं वही यदि हम सब स्त्रियां भी करने लगें तो हम में और उनमें अंतर क्या रह जाएगा? यानी यदि मर्दो का मां-बहन के नाम पर गालियां देना ग़लत है तो फिर अगर हम गाली दें तो खुद को कैसे जस्टिफाई करें?




जो बात सबसे आपत्तिजनक है वह गालियों के स्वरुप को लेकर है. हमारे यहां जितनी भी गालियां प्रचलित हैं वे सभी स्त्री के जननांगों को लेकर और उसकी मान मर्यादा से जुड़ी है. ऐसे में जो गालियां आप पुरुषों से उधार लेकर इस्तेमाल करेंगी तो खुद को ही अपमानित होता पाएंगी ना..
Veere Di Wedding
Veere Di Wedding (Pik Courtesy: Twitter)

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Veere Di Wedding
Veere Di Wedding (Pik Coutesy: Twitter)
तो बेहतर है कि पुरुषों के नक्शेकदम पर न चल कर हम एक ऐसे समाज की संरचना में भागीदार हों जहां गालियों का अस्चित्व ही न हो. या फिर गाली ऐसी हो जो पात्र की बेजा हरक़त या मानसिकता को जा कर सीधे हिट करती हो न कि उसके घर की स्त्रियों की मान मर्यादा को भंग करती हुई.




ये हम कभी न भूलें कि देव वहीं बसते हैं जहां नारी का सम्मान होता है. जरुरी है कि नारी का सम्मान करने की पहल खुद नारी ही करे. अपने आस पास के पुरुषों को उदाहरण से समझाए कि समाज दोनों की बराबरी की सम्मानजनक भागीदारी से बनता है न कि एक दूसरे को गरियाने से….

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