DR. ANITA BHARDWAJ-क्यों न कहें रियल हीरो जो ऊंचाईयों पर पहुंच कर करती हैं जरुरतमंदों की सेवा

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प्रतिभा ज्योति:

Dr. Anita Bhardwaj को यदि आप सही मायने में Real Hero कहें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी. मेडिकल के पेश में हैं और चाहें तो आराम से अपनी क्लीनिक में बैठकर मरीजों को देख सकती हैं, लेकिन उनके मन में कुछ अलग करने के जज्बे ने उन्हें इस पेशे में सबसे अलग कर दिया है.

डॉ अनीता Six Sigma High Altitude Medical Rescue Services के जरिए ऊंचाई वाले क्षेत्रों और दुर्गम स्थनों पर नि:शुल्क चिकित्सा सेवाएं देती हैं. ऐसा करने वाली वे देश की पहली महिला डॉक्टर हैं. वे विभिन्न मेडिकल कैम्पों में अब तक 5889 पीड़ित महिलाओं को प्राथमिक चिकित्सा सेवा दे चुकी है.

चिकित्सा के क्षेत्र में डॉ अनीता के इसी उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए उन्हें वर्ष 2017 के नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन उन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया है.

डॉ अनीता ने वुमनिया के साथ खास बातचीत में बताया कि Six Sigma High Altitude Medical Rescue Services की शुरुआत उनकी अपनी पहल है जिसे उन्होंने अपने पति डॉ प्रदीप भारद्वाज के प्रोत्साहन के बाद शुरु किया. वे इस कंपनी की डाइरेक्टर हैं.

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Six Sigma Healthcare ऊंचाई वाले क्षेत्रों पर लोगों को मुफ्त चिकित्सा सेवाएं मुहैया करा रही हैं. कंपनी उच्च क्षेत्रों के अलावा प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप और बाढ़ से पीड़ितों को चिकित्सा सेवाएं देती हैै. वे बताती हैं कि हमारी कंपनी किसी सरकारी सहायता के बगैर कार्य करती है.

वे Any Height, Anywhere, Anytime, Any Whether and Any Hill के फॉर्मूला पर काम कर रही हैं और जहां-जहां उनकी जरुरत हुई वहां अपनी टीम के साथ सबसे पहले पहुंच जाती है और फ्री मेडिकल सेवाएं देती हैं. वे अपने साथ दवाईयां, जरुरत का सारा सामान खुद ही लेकर जाती हैं और अपनी टीम के लिए खाने का इंतजाम भी खुद ही करती हैं.

कैलाश मानसरोवर यात्रा में उन्होंने डोल्मा पास में 19500 फीट की ऊंचाई पर 750 पीड़ितों को चिकित्सा सहायता देकर उनकी जान बचाई थी. 2015 में नेपाल में आए भीषण विनाशकारी भूकंप में गोरखा जिले में सिक्स सिग्मा हाई एल्टीट्यूड मेडिकल रेस्क्यू टीम के साथ सबसे पहले पहुंचकर आपदा से पीड़ित 1700 से अधिक लोगों की सहायता की थी.

इसके अलावा 2014 में श्री अमरनाथ यात्रा के दौरान 11290 श्रद्धालुओं को चिकित्सा सेवा देकर उनको नई जिंदगी दी. वे हर साल मानसरोवर की यात्रा पर जाती हैं. वे कहती हैं कि चाहे कोई यात्रा हो या कोई आपदा सबसे ज्यादा दिक्कतें और तकलीफ महिलाओं और बच्चों को होती है. मेरी कोशिश है कि ऐसी महिलाओं और बच्चों तक मैं सबसे पहले पहुंच सकूं.

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डॉ अनीता ने बताया कि उनकी कंपनी का एक एप है जिससे जरिए उन्हें देश में कहीं भी आने वाली प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ, भूकंप और किसी भी प्राकृतिक संकट के बारे में तुरंत पता चल जाता है. यही वजह है कि केदरानाथ में जब प्राकृतिक आपदा आई, या नेपाल में भूकंप वे अपनी टीम के साथ सबसे पहले वहां पहुंच गई थीं.

कंपनी के पास दुर्गम क्षेत्रों में कार्य करने वाले 80 डॉक्टरों और 400 वॉलंटियरों की प्रशिक्षित टीम है. वालंटियर्स को खास तरह की ट्रेनिंग दी जाती है. बीएसएफ और आईटीबीपी के साथ ज्वाइंट ट्रेनिंग करते हैं जो उन्हें प्राकृतिक आपदा के दौरान किसी भी कठिनाई से निबटने में समक्ष बनाते हैं.

उनके पति डॉ प्रदीप भारद्वाज का कहना है कि डॉ अनीता देशभक्ति के जज्बे के जरिए इस कार्य को कर रही हैं और वे  मौसम से लेकर कई मुश्किलों का सामना करते हुए पूरे समर्पण से जरुरतमंद लोगों की देखभाल करती हैं.

वे बताते हैं उनके साहसी कार्यों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा विभिन्न राज्यों सरकारों, जम्मू.कश्मीर. हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और सिक्किम के अतिरिक्त अंतर्राष्टकृीय स्तर पर वियतनाम और नेपाल की सरकारों ने भी सराहा है.

डॉ अनीता को उच्च उक्तांश क्षेत्रों में मेडिकल सेवाएं देने के लिए पहले भी कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पुरस्कारों से सम्मानित किया चुका है. 2017 में उन्हें राष्टकृीय ई.गवर्नेंस पुरस्कार, 2016 में हरियाणा सरकार का कल्पना चावला शौर्य पुरस्कार के अलावा दिल्ली सरकार के वूमेन एचीवमेंट पुरस्कार से नवाजा जा चुका है.

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35 वर्षीय अनीता हरियाण के झज्जर की रहने वाली हैं. ‘नारी शक्ति पुरस्कार’ पाने के सवाल पर वे कहती हैं कि बहुत अच्छा लग रहा है कि उनके काम को सराहा गया है क्योंकि वे शुरु से चाहती थीं कि कुछ अलग हट कर करें.

वे बताती हैं कि उनके पति ने कुछ अलग करने के लिए उन्हें बहुत प्रोत्साहित किया. दुर्गम इलाकों में जाते समय बच्चों को छोड़कर कई-कई दिनों के लिए बाहर रहना पड़ता है लेकिन पति और बच्चों का सहयोग है कि मैं चिंतामुक्त होकर अपने काम को पूरा करके ही लौटती हूं.

उनका कहना है कि मैं चाहती हूं कि अधिक से अधिक महिलाएं वालंटियर्स के तौर पर उनके साथ जुड़ें. महिला सशक्तिकरण के सवाल पर वे कहती हैं कि सबसे अच्छा तो यह लग रहा है कि हरियाणा जो बेटियों को मारने के लिए बदनाम था वहीं की लड़कियां हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं. लड़कियों का इस तरह आगे बढ़ना निश्चित रुप से लोगों की सोच को बदलेगा.

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