क्या MAA बिना कहे जान लेती है मन के हर सवाल ?

49

पम्मी तिवारी:

तांगे वाले की मदद से Maa को तांगे में बमुश्किल चढ़ाया और खुद भी मां को सहारा देते हुए उसके पास ही बैठ गई कि तांगेवाले ने छड़ी को हवा में लहराया और उसकी आवाज़ के साथ वो मरियल सा घोड़ा चल पड़ा. मस्जिद से दस कदम आगे वाली संकरी सी गली में घर जाने के लिए.

अलीगढ़ के सरकारी जिला अस्पताल से आज उसकी मां को छुट्टी मिल गई थी. डाक्टर तो सवेरे ही छुट्टी के लिए कह कर चले गए, लेकिन सब रिपोर्ट बनने, दवा लेने और उसे नर्स से समझने और फिर पर्ची पर अगली तारीख लिखवाने में दिन के चार बज गए थे.




भूख भी लग रही थी, सवेरे से कुछ खाया नहीं था, लेकिन भूख से जितने चक्कर आ रहे थे उससे ज़्यादा उसके दिमाग में ना जाने क्यूं एक बात बार बार घूम रही थी कि मां मर क्यूं नहीं गई?

उसने दिमाग को कई बार झटका दिया, लेकिन बात निकलने को तैयार नहीं कि मां मर क्यूं नहीं…. अजीब लग रहा था उसे. खुद पर गुस्सा भी आ रहा था. मां से बहुत प्यार करती है वह. अपनी जान से भी ज़्यादा. कभी-कभी उसे लगता कि मां ही तो उसकी ज़िंदगी है तो कभी…यह सोच कर सिहर जाती कि वह Maa के साथ नहीं होगी तो…..




जब से होश संभाला तो मां की ही साया रहा सिर पर. कहने को एक बड़ा भाई भी है, लेकिन वह ज़िम्मेदारियों से दूर है. उसने कभी जाना ही नहीं भाई का प्यार क्या होता है? पिता का चेहरा उसे याद भी नहीं.

मां ने एक छोटी सी प्राइवेट कंपनी में काम करके दोनों बच्चों को पाला था. अलीगढ़ में ज़्यादातर छोटे कारखानों में पीतल की चीजें बनाने का काम होता है, उसे कारीगरी तो नहीं आती थी लेकिन वह पीतल की चीज़ों को अपने हाथों से एक नई चमक देने में माहिर थी.

READ THIS: एक-दूसरे पर हमारा TRUST करना क्यों जरुरी है?

पीतल के कारखाने में उड़ती गर्द से मां का शरीर बीमार रहने लगा और वह बुढ़ापा आते-आते अक्सर बीमार रहने लगी. गर्द ने उसके फेफड़ों में कब्ज़ा जमा लिया था. अब उससे घर का काम नहीं होता तो आस–पड़ोस के लोग भाई की शादी के लिए दबाव डालने लगे.

भाई को बी कॉम करने के बाद नौकरी मिल गई लेकिन वह घर में पैसा नहीं देता और ना ही कोई मदद करता. किसी तरह अपनी जमा पूंजी से मां ने भाई की शादी कर दी. अभी उसकी पढ़ाई चल ही रही थी बीए का आखिरी साल था.




भाभी अच्छी पढ़ी लिखी और सरकारी स्कूल में टीचर थी. उन्होंने भाई का उसका ट्रांसफर मुरादाबाद करवा दिया और साथ लेकर चला गईं. भाई को दूसरी कंपनी में मैनेजर की नौकरी मिल गई.

अब उस छोटे से घर में वे दो ही रह गए. बीमारी की वजह से जब मां को नौकरी छोड़नी पड़ी तो उसने एक छोटी नौकरी तलाश ली और साथ में कुछ ट्यूशन कर ली. बस यूं कह लीजिए कि गुज़ारा भर चलता था.

मां को हर महीने दो महीने में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता. सरकारी अस्पताल में पैसा नहीं लगता लेकिन दवा पानी का ही खर्च काफी हो जाता और फिर टेस्ट के पैसे भी लगते, क्योंकि सरकारी अस्पताल की मशीनें या तो काम नहीं करती या फिर किसी बड़े आदमी के कहने सुनने पर ही टेस्ट हो पाते.

SEE THIS:  RELATIONSHIP के लिए सीरियस हैं तो ‘उसे’ SPACE देना भी सीखें

उनका नंबर ही नहीं आता. हर बार जब मां को छुट्टी मिलती तो वो बहुत खुश होती. राहत की सांस लेती और घर पहुंच कर मां को उनकी पसंद का बना कर कुछ खिलाती.

मां से ही तो रौनक थी उसके चेहरे पर, लेकिन हर बार उनके अस्पताल में भर्ती रहने से काम से छुट्टी लेनी पड़ती तो अगले महीने आधी अधूरी तनख्वाह मिलती लिहाजा मुश्किलें बढ़ने लगी थी.

मां की बीमारी से कर्जा बढ़ने लगा. रिश्तेदार और पड़ोसी जब भी घर आते तो मां पर उसकी शादी का दबाव डालते, लेकिन उसने साफ इंकार कर दिया था. अब जहां कर्जदार तकाजा करते वहीं कर्ज मिलना भी मुश्किल हो गया था.

मां को सहारा देकर ठीक से तांगे में बिठाया था. मां को छुट्टी तो मिल गई थी, लेकिन लग रहा था कि उन्हें जल्दी फिर अस्पताल लाना पड़ेगा.

यानी कर्जा सिर पर और चढ़ जाएगा. आज कल तो खाने की लिए भी तंगी होने लगी थी क्योंकि दवाओं का खर्च बढ़ता जा रहा था. सोचते- सोचते पता ही नहीं चला कि तांगे वाले ने आवाज़ दी बहन जी पहुंच गए हैं, उतरिए..

घर के दरवाजे के बाहर लेटा मरियल कुत्ता उठ कर चला गया. दरवाजे की कुंडी खोली तो वह टूट कर लटक गई. मां को खाट पर लिटा दिया. मटके से ग्लास में पानी भरा मां को पिलाने के लिए आवाज लगाई तो लगा कि शायद उसने सुना नहीं. हाथ लगा कर उठाने की कोशिश की तो मां का सिर एक तरफ लटक गया ..

क्या मां ने सुन लिया था उसके मन का सवाल..

महिलाओं से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करेंट्विटर पर फॉलो करे… Video देखने के लिए हमारे you tube channel को  subscribe करें