क्या आप 1 दिन में 3 से ज्यादा SELFIE डालती हैं SOCIAL MEDIA पर?

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प्रियंवदा सहाय:

आप एक दिन में अगर तीन से ज्यादा अपनी फोटो यानी Selfie खींचकर Social Media  पर डालती हैं तो समझिए आप मनोरोग की गंभीर समस्या की ओर तेजी से बढ़ रही हैं. सेल्फी का संबंध दिमाग से है और यह धीरे-धीरे बड़े मनोरोग का कारण बनता जा रहा है. यह व्यक्ति के अकेलेपन, सेल्फ ऑब्सेस्ड होने और दिमागी विकार को सामने लाता है.

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अमेरिकन साइकेट्रिक एसोशिएशन ने सेल्फी लेने जैसे सेल्फ़ ऑब्सेस्ड होनेकी समस्या को तीन श्रेणी में बांटा है जो आपकी दिमागी हालत को बयां करती है.मसलन…

1-रोजाना तीन सेल्फी लेने की आदत है तो समझिए समस्या सीमा रेखा पर आ चुकी है.

2-अगर कम से कम तीन सेल्फी लेकर उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट की आदत बन चुकी है तो यह बीमारी आपके लिए घातक हो चुकी है.

3-लेकिन रोजाना छह या इससे ज्यादा सेल्फी लेने और पोस्ट करने की आदत है  तो यह मनोवैज्ञानिक रुप से क्रॉनिक बीमारी का लक्षण है. ऐसे व्यक्ति को मनोचिकित्सक की निहायत ही जरुरत है.

मुंबई की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट प्रतिष्ठा त्रिवेदी कहती हैं कि सेल्फी एक सेल्फ ऑब्सेशन या एडिक्शन है. कुछ लोगों को खुद को सोशल मीडिया पर वैलिडेट कराए बिना चैन नहीं मिलता. इसलिए वे बार-बार अपनी सेल्फी सोशल मीडिया पर डालतें है जिससे ज्यादा से ज्यादा लाइक और कमेंट्स मिल सके.

वे कहती हैं कि सेल्फी का ऑब्सेशन जब बढ़ जाता है चुका है तो कुछ ऑर्डर जन्म लेते हैं जैसे- कांफिडेंस लूज हो जाता है, हीनभावना बढ़ना. ऐसे लोग अपने अंदर कमी ढूंढने लगते हैं.

दुनिया भर के मनोवैज्ञानिक यह मानते हैं कि ज्यादा सेल्फ़ी लेने से मानसिक स्थिति बिगड़ने की आशंका होती है. इसकी वजह से दूसरों के साथ संबंधों पर भी असर पड़ता है.

थाइलैंड में सेल्फी और दिमागी संतुलन को लेकर जब एक अध्ययन किया गया तो यह सामने आया कि सेल्फी फैन बुरी तरह से जुनूनी, आत्म मग्न और आत्म मुग्ध हैं. उनका अकेलापन खुद को ज्यादा पसंद करने के लिए प्रेरित करता है. यह बर्ताव धीरे-धीरे पागलपन से जुड़ने लगता है.

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आप इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि अमूमन सेल्फी लेने वालों को यह लगता है कि उन्होंने किसी किसी खास एक क्षण का काफी आनंद लिया है, लेकिन वास्तव में सेल्फी लेने की फितूर की वजह से वे किसी खास क्षण का आनंद उठाने की जगह इसे कैमरे में कैद करने के लिए बेचैन रहते हैं. कई तरह से सेल्फी लेने का जुनून कभी-कभी उनके जान पर भी बन आती है.

ऐसे लक्षण आप में भी दिखने लगे तो तुरंत खुद को संयमित करने या मनोचिकित्सक से मिलें.