“मां” WORLD के किसी भी कोने की हो, बच्चा रोए तो गोद में उठा ही लेती है

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World

संयोगिता कंठ:

कहते हैं ईश्वर हर जगह नहीं जा सकते, सबके पास नहीं हो सकते इसलिए उसने “मां” को हमारे पास भेज दिया है. मां तो मां होती है. फिर चाहे वह World के किसी भी कोने की हो जब उसका बच्चा रोता है तो हर मां की एक जैसी ही प्रतिक्रिया होती है. बच्चा रोए तो गोद में उठाकर वह उसे प्यार करने लगती है.




चाइल्ड हेल्थ एंड ह्यूमन डेवलपमेंट नामक संस्था ने अमेरिका में किए गए एक अध्ययन में यह नतीजा निकाला है कि मां चाहे दुनिया के किसी भी कोने में हो बच्चे के रोने पर हर मां में एक जैसी प्रतिक्रिया ही होती है.

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यह अध्ययन 11 देशों की लगभग 684 मांओं के ऊपर किया गया है. अध्ययन में कहा गया है कि बच्चे के रोने पर लगभग हर मां ने सबसे पहले बच्चे को गोद में उठाकर उसे चुप कराने की कोशिश की. 




शोधकर्ताओं के मुताबिक मां दुनिया के किसी भी कोने की हो, अपने बच्चे को रोता देखकर उनका मस्तिष्क लगभग एक ही तरीके से प्रतिक्रिया देता है. 

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मां का गोद बच्चे को सबसे सुरक्षित लगता है. बच्चे के सही स्वावस्थय विकास के लिए उसका मां की गोद में रहना जरुरी होता है. बच्चा नवजात हो तब भी वह अपनी मां को पहचान लेता है. इसलिए जब रोते हुए बच्चे को गोद में उठाया जाता है तो उसे लगता है कि अब उसे कोई परेशानी नहीं होगी. इसलिए कई बार बच्चे मां की गोद में जाते ही चुप हो जाते हैं. 




मां भी अक्सर बच्चे के रोने का कारण जान ही जाती हैं. बच्चा बहुत छोटा हो तब भी. बच्चा भूख की वजह से रो रहा है या बिस्तर गीला करने की वजह से या पेट दर्द या किसी और कारण से मां बच्चे को गोद में लेने के बाद यह आसानी से जान जाती है. 

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