अपने बच्चों को SEXUAL ASSAULT से बचाने के 10 तरीके

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गुरुग्राम के रेयान पब्लिक स्कूल में बच्चे के साथ हुआ जघन्य अपराध हो या कुछ ही दिन पहले चंडीगढ में मामा की दुष्कर्मों का शिकार होकर 10 साल की उम्र में मां बनी लड़की की कहानी, ये हमारे विश्वास को हिला कर रख देते हैं. यकीन ही नहीं होता कि हमारे बच्चे अब कहीं सेफ नहीं है. जिस तरह बच्चों के साथ Sexual Assault की घटनाएं घर और स्कूलों में बढ़ रही है उसने पूरे समाज में एक भय का माहौल बना दिया है. किस पर भरोसा किया जाए और क्या किया जाए ऐसे कई सवाल हैं जो आपको परेशान करते है. यूं तो बच्चों को स्वस्थ बचपन देने की जिम्मेदारी पूरे समाज की है लेकिन पेरेंटस यदि थोड़ी सी सतर्कता और सावधानी बरतें तो बच्चों को कई तरह के यौन हिंसा से बचाया जा सकता है. 




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बच्चों के साथ बढ़ रही यौन हिंसा की घटनाओं से आपका भयभीत हो जाना लाजिमी है पर ये भी संभव नहीं कि हम अपने बच्चे को हमेशा अपनी नजरों के सामने ही रखें. उन्हें पढ़ने-लिखने, खेलने-कूदने और दूसरी गतिविधियों के लिए हमें उन्हें बाहर भेजना ही होगा. पर यदि कुछ खास बातों का ध्यान रखा जाए तो इस तरह की घटनाओं को समय रहते रोका जा सकता है.




1-दो-तीन साल का होते ही बच्चों को गुड टच बैड टच की जानकारी अच्छी तरह से दें. उन्हें कहानी के जरिए टच के बारे में समझाएं. बच्चों को खुलकर समझाएं कि यदि पेरेंट्स के अलावा कोई उनके प्राइवेट पार्टस को छूता है तो वे मम्मी-पापा को तुरंत इसके बारे में बताएं.  

2-टीवी, विडियो या कार्टून के जरिए बच्चों को  ऐसी घटनाओं और इससे बचने के उपाय बताएं. उन्हें इसके बारे में प्यार से समझाने का प्रयास करें .




3-बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार रखें. बच्चों को यह विश्वास दिलाएं कि वे मम्मी-पापा से कोई भी बात शेयर कर सकते हैं. ऐसा करने से आप अपने बच्चों का भरोसा जीत पाएंगे और वो आपसे अपनी हर बात बेझिझक कह सकेंगे . स्कूल या कहीं से भी आने के बाद उनकी दिन-भर की गतिविधियों पर बात करें.

4-बच्चों को शुरु से ही बोल्ड बनाने का प्रयास करें. उनका आत्मविश्वास बढाने के लिए उन्हें कई तरह के खेल या कराटे सिखा सकते हैं.

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5-आसपास के लोगों पर भी जरुरत से ज्यादा भरोसा न करें. उनका व्यवहार आपके बच्चे के साथ कैसा है हमेशा नजर बनाए रखें.

6-घर में यदि कोई रिश्तेदार आपके साथ रहता हो तो उस पर भी एक नजर रखें. बच्चों को उनके साथ अकेला छोड़ने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार कर लें.

7-बच्चों को समझाएं कि यदि अंजाने लोग उन्हें खाने-पीने की कोई चीज देतें हैं वे तो वे  इसे लेने से मना कर दें

8-बच्चों को किसी अंजान के साथ कहीं भी न जाने की साफ हिदायत दें . सोसाइटी के गार्ड, माली, ़ड्राइवर या नौकरों से भी ज्यादा घुलने-मिलने से मना करें.

9-बच्चों को पार्क, मॉल, रेस्टोरेंट, स्टेशन या किसी भी जगह पर अकेला न छोड़ें. ऐसी जगहों पर उन्हें टॉयलेट के लिए भी अकेले नहीं जाने दे. 

10-बच्चों को यह समझाएं कि यदि वे ग्रूप में या अकेले सोसाइटी, अपने मोहल्ले या पार्क में खेल रहे हों तो कभी भी गैराज या पार्किंग एरिया में न जाएं. कई बार बच्चे अपनी बॉल लाने के चक्कर में ऐसी जगहों पर अकेले चले जाते हैं. 

घटनाएं कहीं भी हो सकती हैं लेकिन हम यदि कुछ बातों का ध्यान रखेंगे अपने बच्चों को सेफ रख सकते हैं. 

 

 

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