क्या कॉर्पोरेट सेक्टर में महिलाएं खुद नहीं चाहती हैं TOP पर पहुंचना?

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Top corporate women

दुनियाभर में कॉर्पोरेट सेक्टर में न केवल  महिलाओं की संख्या बढ़ रही है, बल्कि वे लीडरशीप की भूमिका में भी है. लेकिन कई महिलाएं Top पर पहुंचने की इच्छा भी नहीं रखती हैं. जी हां हाल में ही लिक्डइन ने जो रिपोर्ट जारी की है उसके मुताबिक दुनियाभर में कॉर्पोरेट सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी तो बढ़ी है लेकिन पुरुषों के मुकाबले वे अपनी पोजीशन को लेकर ज्यादा चाहत नहीं रखती हैं. 35 फीसदी महिलाएं चाहती ही नहीं कि वे Top पर पहुंच कर लीड करें. इस मामले में उनकी खुद की सोच ही उन्हें पुरुषों से पीछे रखती है. 




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लिंक्डइन ने यह स्टडी 2008 से 2016 के दौरान दुनियाभर में कॉर्पोरेट सेक्टर में हुए बदलावों पर किया है. इसमें कहा गया है कि जहां 72 फीसदी पुरुषों की महत्वाकांक्षा होती है कि वे टॉप पर रहें वहीं ऐसा सोचने वाली केवल 65 फीसदी महिलाएं ही है.  एक फर्क यह भी देखा गया कि जहां 75 फीसदी पुरुषों को यह भरोसा होता है कि वे टॉप पर पहुंच ही जाएंगे वहीं केवल 63 फीसदी महिलाएं ही सोचती हैं कि वे टॉप में जगह बना पाएंगी. 




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स्टडी के मुताबिक हर 4 में से 1 महिला लीडरशीप रोल में है यानी 25 फीसदी. इसमें अमेरिका और कनाडा की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है. इनमें से एक तिहाई तो अपनी कंपनी में डाइरेक्टर या उससे भी बड़े पद पर पहुंच कर पूरी कंपनी को लीड कर रही हैं. वहीं भारत का भी इसमें कम अहम योगदान नहीं है. 2008 से 2016 तक इस दौरान भारत में लीडरशीप रोल के लिए जितनी महिलाओं को चुना गया वह आंकड़ा 25 फीसदी बढ़ा है. 




रिपोर्ट यह भी बताती है कि एचआर और अकाउंटिंग क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से ज्यादा है. इन दोनों क्षेत्रों में महिलाों को सबसे ज्यादा लीड करने का मौका मिल रहा है. एचआर में लीडरशीप रोल में जहां 61 फीसदी महिलाएं है वहीं अकाउंटिंग में 48 फीसदी. 

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