मां बाप के लिए अपना फर्ज इस तरह निभा रहा बेटा, खुद कैंसर से पीड़ित पर DEMENTIA में पड़ी मां की कर रहे 11 साल से सेवा

973
Dementia
Cancer patient Santosh takes care of mother who is suffering from dementia

संयोगिता कंठ:

Santosh Kumar Joshi 2008 से ही आंतों के कैंसर के मरीज हैं. उनकी मां लंबे समय से Dementia बीमारी का शिकार हैं.  Dementia  ने उन्हें इस तरह लाचार बना दिया है कि बिस्तर पर लेटे-लेटे ही वे सबकुछ करती हैं.

पर संतोष अपनी बीमारी भूलकर अपनी मां की सेवा में लगे रहते हैं. Dementia की शिकार मां किसी को पहचानती नहीं, कुछ बोलती नहीं लेकिन वे अपने बेटे का फर्ज निभा रहे हैं.

MUST READ: SONALI BENDRE को भी लड़ना होगा कैंसर की जंग से, न्यूयॉर्क में चल रहा इलाज




किस्मत ने उनके साथ यहीं ज्यादती नहीं रोकी. पिता केशव दत्त जोशी की दोनों kidney फेल हो गई. अब पिता के इलाज की जिम्मेदारी भी संतोष पर आ गई.

 

वे हर दिन  Dementia में पड़ी अपनी मां की सेवा करते हैं और सप्ताह में तीन दिन पिता को Dialysis के लिए ले कर जाते हैं. मां के रिसते घावों की मरहम पट्टी और अन्य घरेलू कार्य 11 सालों से यही इनकी दिनचर्या है. इस व्यस्तम व बेहद परेशानी भरी दिनचर्या के कारण ये अपनी नियमित जांच भी समय से नहीं करवा पाते.




उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर के रहने वाले संतोष कुमार जोशी रोजाना एक नई चुनौती का सामना कर रहे हैं. एक तरफ जहां उन्हें अपना इलाज भी करवाना होता है वहीं Dementia के कारण लगभग Coma में पड़ी मां के इलाज और देखरेख का खर्च उठाना पड़ रहा है.

READ THIS:  MEDICAL TEST AFTER 40- इन बीमारियों से बचने के लिए करवाएं ये 6 TEST

वहीं पिताजी के सप्ताह में तीन दिन डायलीसिस पर भी लगभग 25 से 30 हजार रुपए का खर्च भी बढ़ गया है. घर का आर्थिक बोझ अध्यापक पद से सेवानिवृत्त पिता की पेंशन पर निर्भर था. लेकिन 2012 में पिता जी की किडनी की बीमारी से जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. 




तब से लेकर आज तक पिता जी को लेकर सप्ताह में तीन दिन डायलीसिस  करवाने के लिए अस्पताल ले जाते हैं. तीन-तीन लोगों के गंभीर बिमारी का शिकार होने से घर की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई हैं. कैंसर पीडि़त होने के कारण संतोष को दिल्ली के ओखला में अपना छोटा Business भी 2008 में बंद करना पड़ा.

उनके पास कमाई का कोई साधन नहीं. संतोष का खुद का इलाज दिल्ली के Guru Teg Bahadur Hospital में चल रहा है. पत्नी हाऊसवाइफ़ हैं. उनके दो बच्चे हैं. बड़ी बेटी 10 साल की और छोटा बेटा 2 साल का. कैंसर पीड़ित होने के कारण वे कोई नौकरी कर पाने में भी सक्षम नहीं है.

 

उन्हें जानने वाले अक्सर उन्हें मां को लेकर कई तरह के सुझाव देते रहते हैं लेकिन अपनी मां की सेवा में कोई कसर नहीं रखना चाहते.  खुद बीमार होने के बाद भी वे पिताजी के गिरते स्वास्थ्य को लेकर बहुत चिंता में है.

पिताजी को लेकर वे AIIMS और चंडीगढ़ PGI में दर-दर भटक रहे हैं सरकारी अस्पताल में इलाज करवाना ऐसी परिस्थिति में मुश्किल है प्राइवेट में इलाज बहुत महंगा है.

संतोष की चिंता बस यही है कि उनकी बीमारी भी असाध्य है. न जाने कब क्या हो ऐसे में कोमा से पीड़ित मां और पिताजी तथा परिवार को लेकर व्यथित हैं.

वे अपने स्तर पर प्रधानमंत्री Narendra Modi और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Trivendra Singh Rawat
जी को पत्र लिख कर अवगत कराने का प्रयास कर चुके हैं पर अभी तक उन्हें निराशा ही हाथ लगी है.

 

 महिलाओं से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करेंट्विटर पर फॉलो करे… Video देखने के लिए हमारे you tube channel को  subscribe करें