#MyFirstBlood- मेरे कपड़ों पर लगे STAIN पर पहली नज़र लड़कों की पड़ी थी, 13 दिन कमरों में बंद रखा

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Dr. Pallavi Bora
Dr. Pallavi Bora

#MyFirstBlood कैंपेन की 17वीं कड़ी में आज पढ़िए असम की डॉ पल्लवी बोरा के अनुभव. वे बताती हैं कि उनके लिए पहले पीरियड का अनुभव बहुत डराने वाला था. उनके कपड़ों पर Stain लग गया था और इस पर लड़कों की पहली नज़र पड़ी थी जिसे अपशकुन माना गया और 13 दिनों तक एक कमरे में बंद कर दिया.




डॉ. पल्लवी बोरा:

मैं असम से ताल्लुक रखती हूं. हमारे यहां First Period को एक उत्सव के रुप में मनाया जाता है. तोलिनी विवाह के नाम से जाना जाने वाला ये उत्सव बहुत ही व्यापक तरीके से सेलिब्रेट किया जाता है.




इसलिए मुझे पीरियड की थोड़ी बहुत जानकारी पहले से ही थी. लेकिन एक बाल मन से उत्सव के रुप में जानना और उसे झेलने में बहुत फर्क होता है, मेरे साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ.

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मैं रोजाना की तरह स्कूल गई थी, लेकिन आज का दिन मेरे लिए बहुत भारी साबित हो रहा था. मुझे दर्द और बैचैनी महसूस हो रही थी. मेरे साथ क्या कुछ होने वाला है इसका मुझे जरा भी अंदाजा नहीं था.




राहत मिलने की आस लिए जब घर पहुंची तो उस हकीकत से सामना हुआ जो मेरे लिए काफी खौफनाक था. घर पहुंचते ही दीदी की नजर मुझ पर पड़ी और वे चिल्ला उठीं…शुरु हो गया …

मुझे समझते देर नहीं लगी क्या शुरु हो गया. मुझे दीदी के टाइम पर हुआ उत्सव याद आ गया, लेकिन अभी और बहुत कुछ होना था जो मुझे पता नहीं था.

दरअसल मेरा पीरियड घर से बाहर शुरु हुआ था और मेरे पहले धब्बों पर लड़कों की नजर पडी थी.ये एक बहुत बड़ा अपशकुन माना जाता है. अपशगुन को लेकर घर में तरह-तरह की बातें शुरु हो गई.

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मैं घबराहट के मारे रोये जा रही थी. मेरे साथ अपशगुन हुआ था इसलिए मेरी सजा दीदी के टाइम से ज्यादा कठोर होनी थी. दीदी सात दिन तक कमरे मैं बंद की गई थी जबकि मुझे 13 दिन के लिए किया गया.

सात दिन बिना नहाए सिर्फ फलाहार पर रहना पड़ा मुझे. फिर अगले पांच दिन एक टाइम खाने कि इजाजत मिली, वो भी संध्या भोजन जिसे मुझे अपने हाथों से बनाना था. हद तो तब हो गई जब मुझे उस भात को खाने के लिए अपने उल्टे हाथ की मुट्ठी से सिर्फ तीन मुट्ठी खाने की इजाजत दी गई.

बहुत भयानक था मेरे लिए ये सब सहन करना,आखिर किस बात के लिए मुझे ये कठोर सजा दी जा रही है .कुछ समझ नहीं आ रहा था ,दिन भर रोती रही .

तेरह दिन पूरे होने पर मुझे कमरे से निकाला गया. 14 वें दिन परंपरा अनुसार तोलिनी विवाह का कार्यक्रम हुआ. तोलिनी विवाह’ जिसमें 13 दिन बाद लड़की को नहला कर दुल्हन की तरह सजाया जाता है.

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उसे मेखला चादर (परंपरागत परिधान) पहनाया जाता है. इसके बाद केले के पेड़ से शादी करवायी जाती है. जिसके साथ अपशगुन हुआ हो यहां भी उसके लिए अलग रिवाज है. मुझे नामघर मंदिर जाकर दान भी करना पड़ा .

नाते रिश्ते और समाज की औरतों को इनवाइट किया गया. ढेर सारे गिफ्ट मिले, खूब जश्न हुआ लेकिन मेरी तकलीफ और यातना के आगे उसका कोई मोल न रहा. बचपन से उत्सव लगने वाला ये जश्न अब भयानक याद बन चुका था .

ताज्जुब की बात तो ये है कि इस सेलिब्रेशन पर शान शौकत के दिखावे के साथ आधुनिकता का रंग भी चढ गया है पर रिवाज में कोई बदलाव नहीं हुआ.