CHANGE FOR PROGRESS-क्यों लड़कियों से वो बात कहते हैं जो लड़कों से नहीं कह सकते

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सुमन बाजपेयी:

भारत का अग्रणी एथनिक वियर ब्रांड Biba अपने डिजीटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगातार समाज की घिसीपिटी धारणाओं को चुनौती देता आ रहा है. Biba ने वूमेंस डे के अवसर पर अपनी चेंज सीरीज के तहत नई फिल्म ‘Change For Progress’ रिलीज किया है जिसका मैसेज है क्यों लड़कियों से वह बात कहते हैं  जो लड़कों से नहीं कह सकते.

यह चेंज सीरीज अपनी फिल्मों के जरिए बहुत ही मनोरंजक ढंग से समाज की विसंगतियों को सामने लाती है. Change For Progress फिल्म इस बात का संदेश देती है कि लड़के और लड़की दोनों की शिक्षा जरूरी है और लड़कियों को यह क्यों कहा जाता है कि वे ज्यादा पढ़ लिख कर क्या करेंगी आगे तो उन्हें घर ही संभालना है.




इस पुरानी धारणा को फिल्म में बहुत खूबसूरती से चित्रित व उसका समाधान दिया गया है. फिल्म की शुरुआत विवाह के दृश्य से होती है. हर तरफ खुशी का माहौल है और मस्ती छाई हुई है. लड़के-लड़कियों का एक दल अभी-अभी खत्म हुई परीक्षाओं के बारे में बात कर रहा है.

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इस बातचीत में व्यवधान डालते हैं एक लड़के के अंकल जो उससे आकर कुछ बेतुके सवाल पूछने लगते हैं. लेकिन जो सवाल लड़के के लिए बेतुका है उस पर लड़कियों की क्या प्रतिक्रिया है फिल्म इस बात को बहुत सुंदर व सारगर्भित ढंग से बताती है.




इस फिल्म की रूपरेखा तैयार की है ब्रांडमूवर्स इंडिया ने जिसने ही इस चेंज सीरीज की सारी फिल्में तैयार की हैं. बीबा के एमडी सिदार्थ बिंद्रा का कहना है कि इस प्रगतिशील दुनिया में जहां हर रोज, हर पल हमारे चारों ओर बदलाव हो रहा है, वहां अभी भी कुछ ऐसी सामाजिक कुरीतियां हैं जो हमें पीछे की ओर धकेलती हैं.

उनमें से एक समस्या है लड़के-लड़की में अंतर करने का. इस फिल्म में बातचीत के माध्यम से यह बताने की कोशिश की गई है कि वास्तव में प्रगतिशील होने के मायने क्या हैं और औरतों के प्रति नजरिया किस तरह बदला जाना चाहिए.




लड़के-लड़की की चाहे हम कितनी ही समानता की बात कर लें, पर आज भी बहुत सारी अपेक्षाएं औरतों से ही की जाती हैं, खासकर जब बात शादी या घर के कामों की होती है. हमारे समाज की ये मान्यताएं गहरे तक अभी भी हमारी सोच में खुदी हुई हैं.

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औरतों के प्रति ऐसा नजरिया स्वीकार्य व स्वाभाविक माना जाता है. यह फिल्म इन्हीं मान्यताओं व धारणाओं को उखाड़ने की ओर कदम उठाती है और दर्शकों से आग्रह करती है कि वे इस बदलाव का हिस्सा बनें.

ब्रांडमूवर्स इंडिया की चीफ क्रिएटिव ऑफिसर सुवाज्योति घोष का कहना है कि जब औरतों से इस तरह के आम सवाल पूछे जाते हैं कि क्या वह शादी करने के बारे में सोच रही है या उसका क्या इरादा है, तो उसे इतनी सामान्य सी बात मानी जाती है कि हम उन्हें सोचने का एक दूसरा मौका भी नहीं देते हैं.

इस फिल्म में ऐसे समाधान की बात की गई जो न केवल इस बात को अहम बनाता है वरन दर्शकों को सोचने पर भी मजबूर करता है.

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